3 साल की बच्ची ने संथारा लेकर बनाया विश्व रिकॉर्ड, 10 मिनट बाद त्यागे प्राण

Edited By Updated: 03 May, 2025 04:23 PM

3 year old girl created world record by taking santhara

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक दुखद और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ तीन साल, चार महीने और एक दिन की एक छोटी बच्ची ने जैन धर्म की संथारा प्रथा को अपनाकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया। इतनी कम उम्र में संथारा लेने वाली वह दुनिया की पहली बच्ची बताई जा...

नेशनल डेस्क. मध्य प्रदेश के इंदौर में एक दुखद और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ तीन साल, चार महीने और एक दिन की एक छोटी बच्ची ने जैन धर्म की संथारा प्रथा को अपनाकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया। इतनी कम उम्र में संथारा लेने वाली वह दुनिया की पहली बच्ची बताई जा रही है। हालांकि, ब्रेन ट्यूमर से जूझ रही वियाना नाम की इस बच्ची ने संथारा लेने के सिर्फ 10 मिनट बाद ही अपनी जान गंवा दी। उसे अभिग्रहधारी राजेश मुनि ने संथारा दिलाया था।

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वियाना का इलाज चल रहा था और जनवरी में मुंबई में उसका ऑपरेशन भी हुआ था। ऑपरेशन के बाद कुछ दिनों तक उसकी तबीयत ठीक रही, लेकिन मार्च में फिर से बिगड़ने पर उसके माता-पिता उसे लेकर राजेश मुनि के पास पहुंचे। मुनि ने बच्ची की हालत देखकर कहा था कि उसकी रात भी मुश्किल से कटेगी। इसके बाद परिवार ने संथारा लेने का फैसला किया। बच्ची के माता-पिता, पीयूष और वर्षा जैन ने बताया कि 21 मार्च को जैन मुनि के कहने पर उसे संथारा दिलाया गया था। संथारा को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।

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वियाना के माता-पिता पीयूष और वर्षा जैन दोनों ही आईटी प्रोफेशनल हैं। पिछले साल दिसंबर में वियाना को ब्रेन ट्यूमर होने का पता चला था। इंदौर के बाद मुंबई में भी उसका इलाज कराया गया, लेकिन उसकी सेहत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। माता-पिता ने बताया कि वियाना एक हंसमुख और खुश रहने वाली बच्ची थी। उसे बचपन से ही धार्मिक बातें सिखाई जा रही थीं। वह अक्सर गोशाला जाती थी, पक्षियों को दाना डालती थी, गुरुदेव के दर्शन करती थी और छोटे-मोटे धार्मिक व्रत (पचखाण) भी करती थी।

जैन धर्म में संथारा एक ऐसी प्रथा है, जब कोई व्यक्ति अपनी ज़िंदगी पूरी तरह से जी लेता है और उसका शरीर साथ देना छोड़ देता है, तो वह आत्मशुद्धि के लिए संथारा ले सकता है। इसे संलेखना भी कहा जाता है। यह एक धार्मिक संकल्प होता है, जिसमें व्यक्ति धीरे-धीरे अन्न और जल त्याग देता है। न्यायमूर्ति टी.के. तुकोल की किताब 'संलेखना इज नॉट सुसाइड' के अनुसार, संथारा का मकसद आत्महत्या नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करना है। कोई भी गृहस्थ, साधु या मुनि संथारा ले सकता है।
 

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