Edited By Mehak,Updated: 18 Jan, 2026 04:45 PM

अगर आप क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर नहीं चुकाते हैं, तो सिर्फ इसी वजह से गिरफ्तारी नहीं हो सकती। यह मामला सिविल विवाद के तहत आता है। बैंक या कार्ड कंपनी पहले रिमाइंडर और कॉल करती है, फिर रिकवरी एजेंट के जरिए संपर्क किया जाता है। अगर लंबा समय बीत जाए...
नेशनल डेस्क : आज के दौर में क्रेडिट कार्ड सिर्फ सुविधा या शौक नहीं, बल्कि हर एक व्यक्ति की जरूरत बन चुका है। खरीदारी, यात्रा, ऑनलाइन भुगतान और आपात खर्चों के लिए बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, जितना आसान इसका उपयोग है, उतनी ही आसानी से इसमें लापरवाही भी हो जाती है। नौकरी छूटने, व्यापार में घाटा या अचानक मेडिकल खर्च जैसी परिस्थितियों में कई लोग समय पर क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं चुका पाते।
ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा डर यही रहता है कि कहीं पुलिस कार्रवाई न हो जाए या जेल न जाना पड़े। लगातार आने वाले फोन कॉल, मैसेज और रिकवरी एजेंट का दबाव भी चिंता बढ़ा देता है। कई लोगों को लगता है कि बिल न भरने पर सीधे गिरफ्तारी हो सकती है, लेकिन नियम कुछ और ही कहते हैं।
कानून के अनुसार, सिर्फ क्रेडिट कार्ड का बिल न चुकाने पर पुलिस किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती। इसे कर्ज से जुड़ा मामला माना जाता है, जो सिविल विवाद की श्रेणी में आता है। आमतौर पर बैंक या कार्ड कंपनी पहले रिमाइंडर भेजती है, फिर कॉल करती है और बाद में रिकवरी एजेंट के जरिए संपर्क किया जाता है। यदि लंबे समय तक भुगतान नहीं होता है, तो बैंक सिविल कोर्ट का सहारा ले सकता है और कानूनी प्रक्रिया के जरिए रकम वसूलने की कोशिश करता है।
हालांकि, अगर जांच में यह साबित हो जाए कि कार्ड लेते समय फर्जी दस्तावेज दिए गए थे, धोखाधड़ी की गई थी या शुरू से ही भुगतान न करने की नीयत थी, तो मामला आपराधिक बन सकता है। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की स्थिति भी बन सकती है। यानी सामान्य डिफॉल्ट पर जेल नहीं होती, लेकिन धोखाधड़ी साबित होने पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
बिल न चुकाने से भले ही गिरफ्तारी न हो, लेकिन इसके कई बड़े नुकसान जरूर होते हैं। सबसे पहला असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है। एक-दो महीने की देरी भी स्कोर को काफी गिरा सकती है, जिससे भविष्य में होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लेना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, भारी ब्याज और लेट फीस का बोझ बढ़ता जाता है। क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर काफी ज्यादा होती है, जिससे छोटी रकम भी कुछ ही महीनों में बड़ा कर्ज बन सकती है। बैंक आपका कार्ड ब्लॉक कर सकता है और रिकवरी एजेंट की मदद ले सकता है। अगर मामला कोर्ट तक पहुंचता है, तो कानूनी नोटिस, सुनवाई और अतिरिक्त खर्चों का सामना भी करना पड़ सकता है।