Edited By Radhika,Updated: 28 Mar, 2026 01:34 PM

मिडल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव का असर ग्लोबल लेवल पर हुआ है। इससे युद्ध के बीच दुनिया भर के ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है। इसी बीच रूस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। रूस के...
नेशनल डेस्क: मिडल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव का असर ग्लोबल लेवल पर हुआ है। इससे युद्ध के बीच दुनिया भर के ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है। इसी बीच रूस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। रूस के इस फैसले का सीधा उद्देश्य अपने घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करना और सप्लाई सुनिश्चित करना है।
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रूस के फैसले से भारत की बढ़ी चिंता
भारत के लिए यह खबर चुनौतीपूर्ण हो सकती है। 'Strait of Hormuz' में जारी तनाव के कारण खाड़ी देशों से होने वाली तेल की सप्लाई पहले से ही बाधित है, ऐसे में भारत अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर रूस पर निर्भर था। रूस द्वारा निर्यात रोकने से आने वाले समय में सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद रूस के भीतर ईंधन की कीमतें काबू से बाहर नहीं जानी चाहिए।
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भारत सरकार ने कहा 'घबराने की जरूरत नहीं'
रूस के इस कड़े फैसले के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को राहत भरी जानकारी दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव के अनुसार, भारत इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। देश में वर्तमान में कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। अगले दो महीनों के लिए ईंधन की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है। भारतीय रिफाइनरियां वर्तमान में 100% या उससे भी अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं। LPG उत्पादन में लगभग 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो रसोई गैस की किल्लत को कम करने में मदद करेगी।
वैश्विक बाजार पर मंडराते बादल
पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते कच्चे तेल, एलएनजी (LNG) और एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। रूस के इस प्रतिबंध से वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता और कम (Tighter Supply) हो जाएगी, जिससे आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में और उछाल आने की आशंका है। हालांकि, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में फिलहाल किसी भी तरह की कमी या संकट जैसी स्थिति नहीं है और हर परिस्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है।