Edited By Anu Malhotra,Updated: 07 May, 2025 10:34 AM

गर आज शाम आपके इलाके में अचानक सायरन गूंजे और रात को लाइटें बंद हो जाएं, तो घबराएं नहीं – यह जंग नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल का हिस्सा है। 7 मई को देशभर के 244 जिलों में एक साथ की जा रही इस अभूतपूर्व मॉक ड्रिल का उद्देश्य है –...
नेशनल डेस्क: अगर आज शाम आपके इलाके में अचानक सायरन गूंजे और रात को लाइटें बंद हो जाएं, तो घबराएं नहीं – यह जंग नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल का हिस्सा है। 7 मई को देशभर के 244 जिलों में एक साथ की जा रही इस अभूतपूर्व मॉक ड्रिल का उद्देश्य है – जनता, सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की आपातकालीन हालात में प्रतिक्रिया क्षमता को परखना।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में इस अभ्यास को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है। यह ड्रिल दो हिस्सों में होगी – पहला चरण शाम 4 बजे होगा, जब शहर के प्रमुख स्थानों पर एक साथ सायरन बजेंगे। दूसरा चरण रात को ब्लैकआउट के रूप में आयोजित किया जाएगा, जिसमें शहर की लाइटें बंद कर सुरक्षा प्रोटोकॉल का अभ्यास किया जाएगा।
22 जगहों पर गूंजेगा सायरन
जयपुर के जिला कलेक्टर जितेंद्र कुमार सोनी ने जानकारी दी कि शहर के 22 प्रमुख स्थानों पर हूटर सिस्टम लगाया गया है। शाम 4 बजे इन सभी जगहों पर एक साथ सायरन बजेगा। इसका उद्देश्य लोगों को यह सिखाना है कि हवाई हमले या किसी अन्य आपात स्थिति में किस तरह की प्रतिक्रिया अपेक्षित है।
सायरन वाले प्रमुख स्थान:
जिला कलेक्ट्रेट
शास्त्री नगर
चांदपोल पावर हाउस
चौगान स्टेडियम
एमआई रोड BSNL ऑफिस
घाटगेट सेंट्रल जेल
राजभवन
सचिवालय
आमेर (जोरावर सिंह गेट)
MNIT
बजाज नगर, दुर्गापुरा आदि
ब्लैकआउट: जब अंधेरे में जागरूकता होगी रोशन
ड्रिल के दूसरे चरण में रात के समय ब्लैकआउट अभ्यास किया जाएगा। इस दौरान लाइटें बंद कर यह अभ्यास कराया जाएगा कि बिना बिजली के हालात में लोग किस तरह संवाद बनाए रखें और सुरक्षित रहें। इससे यह भी परखा जाएगा कि संकट के समय प्रशासन और आम नागरिकों में कितना समन्वय है।
ड्रिल में ये मुख्य गतिविधियाँ होंगी शामिल:
-हवाई हमले के सायरन की लाइव टेस्टिंग और नागरिक प्रतिक्रिया।
-हमले की स्थिति में भीड़-नियंत्रण और नागरिकों को अलर्ट करना।
-ब्लैकआउट के तहत बिजली कटौती और अंधेरे में सुरक्षा प्रबंधन।
-सार्वजनिक व निजी संस्थानों की आपात योजना की समीक्षा।
-प्राथमिक उपचार, वैकल्पिक प्रकाश साधन (टॉर्च/मोमबत्ती) और जरूरी चीजें रखने की जानकारी।
-फायर ब्रिगेड, मेडिकल टीम, सिविल डिफेंस, और अन्य आपात सेवाओं की तत्परता का मूल्यांकन।
पहलगाम हमले के बाद बढ़ी मुस्तैदी
बता दें कि यह ड्रिल ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न जिलों में सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को परखने के लिए यह मॉक ड्रिल अनिवार्य की है।
अधिकारियों ने की समीक्षा बैठक
इस अभ्यास की तैयारियों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय में समीक्षा बैठक भी हुई। इसमें मुख्य सचिव सुधांश पंत, संभागीय आयुक्त पूनम, आईजी अजय पाल लांबा, NDMA, NDRF, फायर विभाग, सिविल डिफेंस और अन्य प्रमुख विभागों के अधिकारी शामिल हुए।