Near Death Experience: बच्चे को जन्म देने के बाद मरी और लौट आई, मां ने सुनाई आपबीती, जब आत्मा शरीर छोड़ती है तो कैसा महसूस होता

Edited By Updated: 06 Feb, 2026 12:49 PM

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क्या मौत के बाद भी कोई जहान है? क्या धड़कनें रुकने के बाद भी इंसान की चेतना कहीं जागती रहती है? ये सवाल सदियों से रहस्य बने हुए थे, लेकिन अब विज्ञान ने इस गुत्थी को सुलझाने के लिए अपनी कमर कस ली है। वॉशिंगटन पोस्ट की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक,...

नेशनल डेस्क: क्या मौत के बाद भी कोई जहान है? क्या धड़कनें रुकने के बाद भी इंसान की चेतना कहीं जागती रहती है? ये सवाल सदियों से रहस्य बने हुए थे, लेकिन अब विज्ञान ने इस गुत्थी को सुलझाने के लिए अपनी कमर कस ली है। वॉशिंगटन पोस्ट की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूरोसाइंस के विशेषज्ञ इस बात पर दो गुटों में बंट गए हैं कि मौत को करीब से छूकर लौटने वाले लोग जो कहानियां सुनाते हैं, उनके पीछे की असली हकीकत क्या है।

इस बहस के केंद्र में 37 साल की मियाशा गिलियम की आपबीती है। साल 2012 में बच्चे को जन्म देने के बाद मियाशा का दिल अचानक बंद हो गया। उस दौरान उन्हें एक ऐसा अनुभव हुआ जो होश उड़ा देने वाला था। उन्होंने देखा कि वह अपने शरीर से बाहर निकल गई हैं और डॉक्टरों को खुद को बचाने की जद्दोजहद करते देख रही हैं। इसके बाद उन्हें एक गहरी शांति और अंधेरी सुरंग का एहसास हुआ। ऐसी घटनाएं दुनिया भर में हजारों लोग सुना चुके हैं।

'दिमाग का खेल'
वैज्ञानिकों का एक बड़ा वर्ग इसे सिर्फ 'दिमाग का खेल' मानता है। बेल्जियम और अमेरिका के विशेषज्ञों द्वारा तैयार 'नेपच्यून' मॉडल के अनुसार, जब शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिरता है और कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ती है, तो दिमाग के कुछ हिस्सों में गड़बड़ी शुरू हो जाती है। इसी रासायनिक उथल-पुथल की वजह से इंसान को मतिभ्रम होता है और उसे लगता है कि वह शरीर से बाहर है या उसे चमकदार रोशनी वाली कोई सुरंग दिख रही है। उनके लिए यह सब महज शरीर की एक जैविक प्रक्रिया है।

हालांकि, वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता इस दलील को पूरी तरह सही नहीं मानते। उनका कहना है कि अगर यह सिर्फ दिमाग की कल्पना है, तो मौत के मुंह से लौटे मरीज उन बातों को बिल्कुल सटीक कैसे बता देते हैं जो उनके बेहोश होने के दौरान कमरे में हो रही थीं? कई मरीजों ने यह तक बता दिया कि उस वक्त कमरे में कितने लोग मौजूद थे और वे क्या बात कर रहे थे। 4000 से ज्यादा ऐसे मामलों का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इन अनुभवों को महज कल्पना कहकर खारिज नहीं किया जा सकता।

फिलहाल विज्ञान के पास इन सवालों का कोई एक ठोस जवाब नहीं है। एक तरफ वो लोग हैं जो इसे दिमाग की रासायनिक क्रिया कहते हैं, तो दूसरी तरफ वे जो मानते हैं कि आत्मा या चेतना का वजूद शरीर के खत्म होने के बाद भी हो सकता है। यह बहस जारी है, लेकिन इन अनुभवों ने यह जरूर साबित कर दिया है कि जीवन और मृत्यु के बीच की लकीर उतनी साफ नहीं है जितनी हम समझते हैं। 
 

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