Edited By Anu Malhotra,Updated: 23 Jan, 2026 02:45 PM

अमेरिका के मैरीलैंड में रहने वाली 80 साल की पादरी नॉर्मा एडवर्ड्स कोई साधारण महिला नहीं हैं, वे मौत के दरवाजे को एक बार नहीं, बल्कि तीन बार खटखटाकर वापस लौटी हैं। उनकी जुबानी 'मृत्यु के बाद का आंखों देखा हाल' किसी भी इंसान के रोंगटे खड़े करने के लिए...
नेशनल डेस्क: अमेरिका के मैरीलैंड में रहने वाली 80 साल की पादरी नॉर्मा एडवर्ड्स कोई साधारण महिला नहीं हैं, वे मौत के दरवाजे को एक बार नहीं, बल्कि तीन बार खटखटाकर वापस लौटी हैं। उनकी जुबानी 'मृत्यु के बाद का आंखों देखा हाल' किसी भी इंसान के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है।
ब्रह्मांडीय स्क्रीन पर जीवन का 'Result'
नॉर्मा के साथ मौत का पहला वाकया महज 20 साल की उम्र में हुआ। एक मेडिकल इमरजेंसी के दौरान जब उनकी धड़कनें रुक गईं, तो डॉक्टरों ने उन्हें 'क्लीनिकली डेड' मान लिया। नॉर्मा बताती हैं कि उस वक्त वे अपने शरीर से बाहर निकलकर छत के पास से डॉक्टरों को अपना इलाज करते देख रही थीं। अचानक वे एक अंधेरी सुरंग से होते हुए अलौकिक सफेद रोशनी के सामने खड़ी थीं। वहाँ उन्होंने एक विशाल स्क्रीन देखी, जिसे वे अपनी जिंदगी का लेखा-जोखा मानती हैं।
इस स्क्रीन पर तीन हिस्से थे:- वह जीवन जो उनके जन्म से पहले तय किया गया था। वह जीवन जो उन्होंने असल में जिया। दोनों के बीच का संतुलन। हैरानी की बात यह थी कि उस स्क्रीन पर बार-बार एक ही संदेश आ रहा था- मकसद अभी अधूरा है।
एक कप में सिमटती आकाशगंगा सा दर्द
वहां नॉर्मा की मुलाकात अपनी स्वर्गवासी चाची से हुई, जिन्होंने उन्हें छूने से मना करते हुए संदेश दिया कि 'जीवन कभी खत्म नहीं होता।' जब उनकी आत्मा को दोबारा उनके शरीर में भेजा गया, तो वह अनुभव बेहद कष्टकारी था। नॉर्मा ने इसकी तुलना एक विशाल आकाशगंगा को चाय के छोटे से प्याले में भरने से की। वापस आने के बाद उनमें ऐसी ऊर्जा आ गई कि वे लोगों के शरीर के अंदर की बीमारियां देख सकती थीं और उनके पास आते ही बिजली के बल्ब तक फ्यूज हो जाते थे।
नवंबर 2024: फरिश्ते ने दिखाया रास्ता
मौत से नॉर्मा का दूसरा और तीसरा सामना हाल ही में नवंबर 2024 में हुआ, जब उन्हें दिल का दौरा पड़ा। एम्बुलेंस में ले जाते समय वे फिर से मृत्यु के आगोश में चली गईं। इस बार एक महिला फरिश्ते ने उन्हें रास्ता दिखाया और फिर वही बात दोहराई गई कि उनका मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्हें लोगों के मन से 'मौत का डर' निकालने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
नॉर्मा के अनुभव का सार: मौत अंत नहीं, शुरुआत है
आज नॉर्मा बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के बीच रहकर उन्हें मृत्यु के भय से मुक्त करती हैं। उनके जीवन के तीन मुख्य संदेश ये हैं:- यह अंत नहीं, बल्कि एक नए आयाम में प्रवेश की शुरुआत है। जब तक सीने में सांस चल रही है, तब तक आपके पास कुछ महान करने का अवसर है। हमारा शरीर भले ही मिट जाए, लेकिन चेतना या आत्मा अजर-अमर है। नॉर्मा एडवर्ड्स की यह दास्तां हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वाकई उस मकसद को पूरा कर रहे हैं, जिसके लिए हमें इस धरती पर भेजा गया है?