Edited By Parveen Kumar,Updated: 26 Mar, 2026 09:11 PM

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को तीन हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसका असर अब दुनियाभर के साथ भारत में भी दिखने लगा है। खासकर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस को लेकर लोगों के बीच डर और भ्रम फैल रहा है, जिसके चलते कई जगहों पर...
नेशनल डेस्क : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को तीन हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसका असर अब दुनियाभर के साथ भारत में भी दिखने लगा है। खासकर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस को लेकर लोगों के बीच डर और भ्रम फैल रहा है, जिसके चलते कई जगहों पर पैनिक बॉयिंग देखने को मिल रही है।
सरकार का भरोसा- घबराने की जरूरत नहीं
सरकार ने साफ किया है कि देश में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है। भारत के पास करीब 60 दिनों का पर्याप्त कच्चा तेल और ईंधन स्टॉक मौजूद है। इसके साथ ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) को लगातार बढ़ाया जा रहा है और रूस व अफ्रीकी देशों से अधिक मात्रा में तेल आयात किया जा रहा है। सभी रिफाइनरियों को भी पूरी क्षमता पर चलाया जा रहा है।
कई शहरों में पैनिक बॉयिंग, पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें
सरकारी आश्वासन के बावजूद देश के कुछ शहरों में लोग घबराकर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। लोग अपने वाहनों की टंकी फुल करवा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी आपात स्थिति में परेशानी न हो। सरकार ने अपील की है कि लोग जरूरत के अनुसार ही ईंधन भरवाएं और अफवाहों पर ध्यान न दें।
कितना पेट्रोल-डीजल खरीद सकते हैं आप?
नियमों के अनुसार, आप अपने वाहन में जितनी बार चाहें उतना ईंधन भरवा सकते हैं। लेकिन अगर अलग से पेट्रोल या डीजल लेना हो, तो आमतौर पर 2 से 5 लीटर तक कैन में दिया जाता है। जरूरत बताने पर कुछ पेट्रोल पंप 5-10 लीटर तक भी दे सकते हैं। ध्यान रहे कि ईंधन सिर्फ सुरक्षित और स्वीकृत कंटेनर (स्टील या हेवी प्लास्टिक) में ही मिलेगा, साधारण बोतलों में नहीं।
ज्यादा मात्रा के लिए जरूरी है परमिट
अगर कोई व्यक्ति 20, 50 या 200 लीटर जैसे बड़े स्तर पर पेट्रोल-डीजल लेना चाहता है, तो इसके लिए लाइसेंस या परमिट जरूरी होता है। पेट्रोलियम एक्ट 1934 के तहत ग्राहक को यह बताना होता है कि ईंधन किस काम के लिए लिया जा रहा है और उसे सुरक्षित तरीके से कैसे स्टोर किया जाएगा।
सरकार बना रही है वैकल्पिक रणनीति
मिडिल ईस्ट के तनाव को देखते हुए भारत सरकार अब 27 की जगह करीब 41 देशों से तेल-गैस आयात कर रही है। इसके अलावा रिन्यूएबल एनर्जी और PNG के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि कच्चे तेल पर निर्भरता कम की जा सके। फिलहाल भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है।