Edited By Rohini Oberoi,Updated: 01 May, 2025 04:26 PM

अयोध्या में 500 वर्षों के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद आखिरकार प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर आकार ले चुका है। मंदिर के भूतल पर जहां रामलला विराजमान हैं वहीं अब प्रथम तल पर राम दरबार की स्थापना की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस महत्वपूर्ण चरण में...
नेशनल डेस्क। अयोध्या में 500 वर्षों के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद आखिरकार प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर आकार ले चुका है। मंदिर के भूतल पर जहां रामलला विराजमान हैं वहीं अब प्रथम तल पर राम दरबार की स्थापना की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस महत्वपूर्ण चरण में प्रथम तल पर एक विशेष दरवाजा लगाया जा रहा है जो न केवल अपनी भव्यता बल्कि अपनी ऐतिहासिकता के लिए भी खास है।
यह अद्भुत दरवाजा महाराष्ट्र के बेहतरीन सागवान की लकड़ी से बनाया गया है जिसकी अनुमानित आयु लगभग 1000 वर्ष बताई जा रही है। इस दरवाजे को और भी दिव्य बनाने के लिए इस पर सोने की परत चढ़ाई जा रही है। जानकारी के अनुसार दरवाजे पर पहले तामपत्र लगाया गया है और फिर उस पर सोने का लेप चढ़ाया गया है। यह विशाल दरवाजा 12 फीट ऊंचा और 8 फीट चौड़ा है।
राम मंदिर में कुल 46 दरवाजे लगने हैं और इनमें से 42 दरवाजों पर कुल मिलाकर 100 किलोग्राम सोने की परत चढ़ाई जाएगी। महाराष्ट्र से लाई गई उच्च गुणवत्ता वाली सागवान की लकड़ी इन दरवाजों को न केवल मजबूती प्रदान करेगी बल्कि इनकी आयु भी सदियों तक बनी रहेगी।
जून से होंगे राम दरबार के दर्शन
राम मंदिर के प्रथम तल पर इस स्वर्ण जड़ित दरवाजे के स्थापित होने के बाद यहां भगवान राम के दरबार की स्थापना की जाएगी। राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार जून महीने से राम भक्त न केवल रामलला के दर्शन कर सकेंगे बल्कि भव्य राम दरबार के भी दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करेंगे। यह मंदिर नागर शैली में बनाया गया है और इसके सभी स्तंभों और दीवारों पर देवी-देवताओं की मनमोहक प्रतिमाएं उकेरी गई हैं।
अद्भुत नक्काशी से सजे दरवाजे और दीवारें
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का कहना है कि मंदिर की दीवारों और दरवाजों पर की गई खूबसूरत और अलौकिक नक्काशी ऐसी है जिसे देखकर भक्त बस मंत्रमुग्ध होकर निहारते रह जाएंगे। उन्होंने बताया कि मंदिर का निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में है। मंदिर के परकोटे में देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी स्थापित कर दिया गया है और अब जल्द ही राम दरबार की स्थापना का कार्य भी पूरा हो जाएगा। यह स्वर्ण द्वार और इस पर की गई कलाकृति निश्चित रूप से भक्तों के लिए एक विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी।