Edited By Mehak,Updated: 08 May, 2025 04:39 PM

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान के अंदर 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। बहावलपुर, मुरीदके, बाघ, कोटली और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में की गई यह कार्रवाई दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई। कई देशों ने भारत का...
नेशनल डेस्क. भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान के अंदर 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। बहावलपुर, मुरीदके, बाघ, कोटली और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में की गई यह कार्रवाई दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई। कई देशों ने भारत का समर्थन किया, लेकिन तुर्की ने एक बार फिर पाकिस्तान का साथ दिया।
तुर्की ने भारत की इस जवाबी कार्रवाई को पाकिस्तान की संप्रभुता पर हमला बताया और इसकी आलोचना की। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि तुर्की जिन देशों का साथ देता है, उनके हालात बाद में खराब ही हुए हैं? इतिहास में कई बार ऐसा हुआ जब तुर्की का समर्थन पाने वाले देश या तो टूटे या गृहयुद्ध का शिकार हुए।
1. 1971: पाकिस्तान को समर्थन, बना बांग्लादेश
तुर्की और पाकिस्तान के रिश्ते हमेशा से मजबूत रहे हैं। 1965 और 1971 की भारत-पाक लड़ाई में तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया। लेकिन 1971 में, पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा अलग होकर बांग्लादेश बन गया। तुर्की ने शुरू में बांग्लादेश को मान्यता देने से इनकार किया, लेकिन अंत में उसे अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुकना पड़ा।
2. 1965: मलेशिया को समर्थन, सिंगापुर अलग हो गया
तुर्की ने मलेशिया को उदार मुस्लिम राष्ट्र मानते हुए उसका समर्थन किया। 1963 में मलेशिया में सिंगापुर को शामिल किया गया, लेकिन जातीय तनाव और राजनीतिक मतभेदों के चलते सिर्फ दो साल में सिंगापुर को अलग कर दिया गया। सिंगापुर अब एक आर्थिक शक्ति है, जबकि मलेशिया को नस्ली और धार्मिक तनावों से जूझना पड़ा।
3. सीरिया: तुर्की के समर्थन से भड़की गृहयुद्ध की आग
तुर्की ने सीरिया में बशर अल-असद के विरोधियों को समर्थन दिया। लेकिन इससे सीरिया में लड़ाई और बढ़ गई। आज सीरिया कई हिस्सों में बंटा हुआ है- सरकारी, कुर्दिश, विद्रोही और आईएसआईएस के कब्जे वाले क्षेत्र। तुर्की के समर्थन से चलने वाले गुटों की ताकत बढ़ती गई और देश धीरे-धीरे गृहयुद्ध की चपेट में आ गया।
4. लीबिया: दो सरकारों वाला देश बना
तुर्की ने लीबिया की त्रिपोली स्थित सरकार (GNA) को समर्थन दिया, जबकि दूसरी तरफ रूस और मिस्र ने विपक्षी गुट (LNA) का समर्थन किया। आज लीबिया दो हिस्सों में बंटा है- एक पश्चिमी और एक पूर्वी सरकार के तहत। तुर्की का समर्थन यहां भी विभाजन का कारण बना।
5. उत्तर साइप्रस: सिर्फ तुर्की की मान्यता, बाकी दुनिया से अलग
1974 में तुर्की ने साइप्रस में सैन्य दखल दिया और वहां तुर्की मूल के लोगों के लिए अलग क्षेत्र बना दिया- Northern Cyprus। अब तक इसे केवल तुर्की ही मान्यता देता है, बाकी दुनिया इसे अवैध ही मानती है।