Edited By Anu Malhotra,Updated: 03 Jan, 2026 05:09 PM

मुंबई से ताल्लुक रखने वाली एक NRI महिला ने भारत में इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड में निवेश कर लगभग 1.35 करोड़ रुपये का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कमाया। खास बात यह रही कि उन्होंने इस कमाई पर भारत में कोई टैक्स नहीं चुकाया। वजह थी—उनकी टैक्स रेजिडेंसी...
नेशनल डेस्क: मुंबई से ताल्लुक रखने वाली एक NRI महिला ने भारत में इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड में निवेश कर लगभग 1.35 करोड़ रुपये का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कमाया। खास बात यह रही कि उन्होंने इस कमाई पर भारत में कोई टैक्स नहीं चुकाया। वजह थी—उनकी टैक्स रेजिडेंसी सिंगापुर में होना और भारत-सिंगापुर टैक्स संधि का सही इस्तेमाल।
जब महिला ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया, तो उन्होंने भारत-सिंगापुर डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA) का हवाला दिया। उनका कहना था कि इस तरह का कैपिटल गेन टैक्स लगाने का अधिकार भारत का नहीं, बल्कि सिंगापुर का है।
टैक्स विभाग की आपत्ति और बढ़ता विवाद
इनकम टैक्स विभाग इस दावे से सहमत नहीं हुआ। विभाग का तर्क था कि म्यूचुअल फंड यूनिट्स की वैल्यू भारत में मौजूद एसेट्स से निकलती है, इसलिए टैक्स भारत में लगना चाहिए। इसी आधार पर महिला को नोटिस भेजा गया और उनका दावा खारिज कर दिया गया।
महिला ने इसके बाद डिस्प्यूट रेजोल्यूशन पैनल (DRP) में अपील की, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। मामला आगे बढ़ता गया और आखिरकार पहुंचा इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), मुंबई।
ITAT में निर्णायक बहस
ITAT में महिला की ओर से सबसे अहम दलील यह दी गई कि म्यूचुअल फंड यूनिट्स को कंपनी के शेयरों के बराबर नहीं रखा जा सकता। DTAA में शेयरों से होने वाले कैपिटल गेन और “अन्य संपत्तियों” से होने वाले गेन के लिए अलग नियम हैं।
इस केस में आर्टिकल 13(5) लागू किया गया, जिसके अनुसार ऐसी संपत्ति से होने वाली आय पर टैक्स लगाने का अधिकार केवल उसी देश को होता है, जहां निवेशक टैक्स रेजिडेंट है। चूंकि महिला टैक्स उद्देश्यों के लिए सिंगापुर की रेजिडेंट थीं, इसलिए टैक्स का अधिकार भी सिंगापुर को ही बनता है, भारत को नहीं।
ट्रिब्यूनल का साफ फैसला
ITAT मुंबई ने महिला की दलीलों को स्वीकार कर लिया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून के तहत म्यूचुअल फंड कंपनियां नहीं, बल्कि ट्रस्ट के रूप में बनाए जाते हैं। इसलिए उनकी यूनिट्स को “शेयर” नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया कि महिला को म्यूचुअल फंड से हुए कैपिटल गेन पर भारत में टैक्स नहीं देना होगा।