Edited By ,Updated: 13 Apr, 2016 12:06 PM

इस साल स्किम्ड मिल्क पाऊडर (एस.एम.पी.) की कीमतें 25 फीसदी बढऩे का अनुमान है। इसकी वजह यह है कि अप्रैल से अक्तूबर तक के कमजोर उत्पादन के सीजन के दौरान उत्पादन कम रहेगा
मुंबईः इस साल स्किम्ड मिल्क पाऊडर (एस.एम.पी.) की कीमतें 25 फीसदी बढऩे का अनुमान है। इसकी वजह यह है कि अप्रैल से अक्तूबर तक के कमजोर उत्पादन के सीजन के दौरान उत्पादन कम रहेगा और ज्यादा मौसमी मांग आएगी। कुछ सप्ताह पहले एस.एम.पी. की कीमतें 125 से 130 रुपए प्रति किलोग्राम तक गिर गई थी लेकिन अब ये सुधरकर 140 से 150 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई हैं। हालांकि वर्तमान कीमतें 18 महीने पहले के स्तर 290 रुपए प्रति किलोग्राम से करीब 50 फीसदी नीचे हैं लेकिन कीमतें दीवाली पर सबसे अधिक मांग के सीजन के अंत तक सुधरकर 175 से 180 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाने की संभावना है।
दूध पाऊडर की कीमतों में तेजी से सुधार इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इस पूरी जिंस शृंखला में कमजोरी से तरल दूध से किसानों की आमदनी बुरी तरह प्रभावित हुई है। गौरतलब है कि तरल दूध से ही दूध पाऊडर बनता है। एस.एम.पी. की कीमतों में बढ़ौतरी से इसी अनुपात में किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी क्योंकि दूध प्रसंस्करणकर्ता अपना मुनाफा बढऩे का फायदा तत्काल किसानों को देंगे।
गोवर्धन ब्रांड के दूध और चीज की उत्पादक पराग मिल्क फूड्स लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रणनीतिक योजना) श्रीश उपाध्याय ने कहा, 'निर्यात मांग घटने के कारण एस.एम.पी. की कीमतों पर पिछले 18 महीनों से दबाव है। पाइपलाइन इन्वेंट्री में भारी गिरावट और अप्रैल से अक्तूबर के दौरान कमजोर उत्पादन सीजन में कम उत्पादन के कारण कीमतों में सुधार आएगा। इस साल त्यौहारी मांग से एस.एम.पी. की कीमतों में कम से कम 25 फीसदी बढ़ौतरी होगी।'
दरअसल, इस रुझान में पिछले एक सप्ताह से बदलाव आया है और गर्मी का सीजन शुरू होने के साथ ही एस.एम.पी. की कीमत 10 से 15 रुपए प्रति किलोग्राम बढ़ी है। तरल दूध की सबसे अधिक मांग के सीजन यानी नवंबर से मार्च के बीच घरेलू बाजारों में एस.एम.पी. की मांग कम रहती है। बहुत से बड़े, मध्यम एवं लघु डेयरी किसानों ने पशुओं के स्वास्थ्य और उन्हें अच्छा चारा खिलाने पर ध्यान देना शुरू किया है, ताकि पशुओं से पोषक दूध मिले। इससे देशभर में दूध का उत्पादन बढऩे लगा है।
फिलिप कैपिटल की एक हालिया रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वित्त वर्ष 2015 में भारत में दूध का उत्पादन 14.7 करोड़ टन रहेगा, जो पिछले वर्ष से 5 फीसदी या 70 लाख टन अधिक है। इसी तरह भारत में दूध की खपत भी वित्त वर्ष 2015 में बढ़कर 13.8 करोड़ टन हो गई, जो इससे पिछले साल से 6 फीसदी या 80 लाख टन अधिक है। दूध के उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी के चलते पशुपालक किसानों पर अचानक दबाव आ गया है क्योंकि डेयरियां दूध की अतिरिक्त मात्रा खरीदने को तैयार नहीं हैं। इस वजह से किसान डेयरियों को कम कीमतों दूध बेच रहे हैं। पिछले 18 महीनों में किसानों, विशेष रूप से महाराष्ट्र के किसानों की आमदनी घटकर 19 रुपए प्रति लीटर पर आ गई है, जो एक समय 26 से 27 रुपए प्रति लीटर थी। इस वजह से महाराष्ट्र सरकार को राज्य सहकारी समितियों को तरल दूध से पाऊडर बनाने का आदेश देना पड़ा। महाराष्ट्र सरकार के डेयरी विभाग का अनुमान है कि 2015-16 सीजन में कुल एस.एम.पी. उत्पादन 5,000 टन होगा। राबो इंडिया फाइनैंस लिमिटेड में प्रमुख (खाद्य एवं कृषि अनुसंधान एवं सलाह) पी जी गणेश ने कहा, 'एस.एम.पी. की कीमतें निचले स्तरों पर आ चुकी हैं और आगे इनमें सुधार होगा।'