Bhishma Ashtami 2026 : भीष्म अष्टमी पर बन रहा महासंयोग, पितरों को प्रसन्न करने का है सुनहरा मौका

Edited By Updated: 25 Jan, 2026 12:27 PM

bhishma ashtami 2026

Bhishma Ashtami 2026 : हिंदू धर्म में भीष्म अष्टमी का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। यह दिन महाभारत के महानायक और दृढ़ प्रतिज्ञा के प्रतीक, गंगा पुत्र भीष्म पितामह के निर्वाण की पावन तिथि है। साल 2026 में यह पर्व और भी खास होने वाला है क्योंकि...

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Bhishma Ashtami 2026 : हिंदू धर्म में भीष्म अष्टमी का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। यह दिन महाभारत के महानायक और दृढ़ प्रतिज्ञा के प्रतीक, गंगा पुत्र भीष्म पितामह के निर्वाण की पावन तिथि है। साल 2026 में यह पर्व और भी खास होने वाला है क्योंकि इस दिन शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है। आइए जानते हैं साल 2026 में भीष्म अष्टमी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, बनने वाले विशेष योग और इसका पितरों के लिए महत्व।

Bhishma Ashtami 2026

Bhishma Ashtami भीष्म अष्टमी 2026:

हिंदू पंचांग के अनुसार, भीष्म अष्टमी हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है।

भीष्म अष्टमी तिथि: 26 जनवरी 2026

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 25 जनवरी 2026 को रात 11:10 बजे से
अष्टमी तिथि समाप्त: 26 जनवरी 2026 को रात 09:17 बजे तक
पूजा व तर्पण का मुहूर्त (मध्याह्न काल): सुबह 11:29 से दोपहर 01:38 तक

उदयातिथि के अनुसार, भीष्म अष्टमी का व्रत और अनुष्ठान 26 जनवरी 2026 को ही किया जाएगा। संयोगवश इस दिन भारत का गणतंत्र दिवस भी है, जिससे इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है।

2 शुभ योग में मनाई जाएगी भीष्म अष्टमी
ज्योतिष गणना के अनुसार इस दिन बेहद ही शुभ योग बनने जा रहे हैं। सबसे पहला साध्य योग बनेगा जो सुबह सिर्फ 9 बजे तक रहेगा। इसके बाद शुक्ल योग का निर्माण होगा जो अगले दिन 27 को 6:20 ए.एम तक रहेगा। 

Bhishma Ashtami 2026

Why is this day important for Ancestors पितरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह दिन ?

पितृ दोष से मुक्ति
मान्यता है कि जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष है, उन्हें इस दिन भीष्म पितामह के निमित्त तर्पण अवश्य करना चाहिए। भीष्म पितामह ने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया था और उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी। इसलिए शास्त्रों में विधान है कि कोई भी व्यक्ति उनके लिए तर्पण कर सकता है।

एकोदिष्ट श्राद्ध का महत्व
इस दिन भीष्म पितामह के लिए 'एकोदिष्ट श्राद्ध' किया जाता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन पितामह को जल अर्पित करता है, उसे अपने पूर्वजों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। महाभारत के अनुसार, जो व्यक्ति माघ शुक्ल अष्टमी को जल और तिल से भीष्म का तर्पण करता है, उसके पूरे वर्ष के पाप नष्ट हो जाते हैं।

मोक्ष की प्राप्ति
भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की थी क्योंकि यह समय देवताओं का दिन माना जाता है और इस दौरान प्राण त्यागने से जीव को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी भावना के साथ लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए भी इस दिन प्रार्थना करते हैं।

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