Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य की 7 नीतियां, जो बदल देंगी आपका भविष्य

Edited By Updated: 29 Jan, 2026 02:07 PM

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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय इतिहास के महानतम राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और मार्गदर्शक रहे हैं। उनकी शिक्षाएं और नीतियां, जिन्हें 'चाणक्य नीति' के रूप में संकलित किया गया है, आज हजारों...

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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय इतिहास के महानतम राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और मार्गदर्शक रहे हैं। उनकी शिक्षाएं और नीतियां, जिन्हें 'चाणक्य नीति' के रूप में संकलित किया गया है, आज हजारों वर्षों बाद भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उस समय थीं।

चाणक्य नीति केवल राजाओं के लिए नहीं, बल्कि एक सामान्य मनुष्य के लिए भी सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में चाणक्य की नीतियों को उतार ले, तो उसका भविष्य बदलना निश्चित है। आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य की वे 7 प्रमुख नीतियां जो आपके जीवन को सफल बना सकती हैं।

Chanakya Niti

अपनी कमजोरी और ताकत का ज्ञान
चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा अपनी क्षमताओं का सही आकलन करना चाहिए। वे कहते हैं कि वही व्यक्ति सफल होता है जिसे पता है कि वह क्या कर सकता है और उसकी सीमाएं क्या हैं

रणनीति: किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले खुद से पूछें कि क्या आप उसके योग्य हैं ? अपनी कमजोरियों को पहचानें ताकि शत्रु या प्रतिस्पर्धी उनका फायदा न उठा सकें। अपनी ताकत को पहचानकर उस पर काम करना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

गुप्त रखें अपनी योजनाएं 
चाणक्य नीति का एक महत्वपूर्ण सूत्र है कि अपनी भावी योजनाओं का ढिंढोरा कभी न पीटें। जब तक आपका कार्य पूर्ण न हो जाए, तब तक उसे गुप्त रखें। यदि आप अपनी योजना दूसरों को बता देते हैं, तो ईर्ष्यालु लोग उसमें बाधा डाल सकते हैं या उसका श्रेय चुरा सकते हैं। काम की सफलता ही उसकी गूंज होनी चाहिए, आपकी बातें नहीं।

समय की कद्र करें
समय के बारे में चाणक्य बहुत सख्त थे। उनका मानना था कि बीता हुआ समय और अवसर कभी वापस नहीं आता। जो व्यक्ति आज के काम को कल पर टालता है, वह कभी उन्नति नहीं कर सकता। जीवन में अनुशासन और समयबद्धता ही वह चाबी है जो सफलता के बंद दरवाजे खोलती है। हर सुबह एक नई योजना के साथ उठें और उसे दिन के अंत तक पूरा करने का प्रयास करें।

Chanakya Niti संकट के लिए धन का संचय
चाणक्य कहते थे आपदर्थे धनं रक्षेत् अर्थात संकट के समय के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए। धन को केवल भोग-विलास की वस्तु न समझें। आय का एक निश्चित हिस्सा हमेशा भविष्य के लिए बचाकर रखें। बुरा समय कभी बताकर नहीं आता, और उस समय केवल संचित धन ही आपका सबसे बड़ा मित्र होता है। फिजूलखर्ची से बचना ही बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान है।

शत्रु को कभी छोटा न समझें
रणनीति के मामले में चाणक्य का कोई सानी नहीं था। वे मानते थे कि किसी भी प्रतिद्वंद्वी या समस्या को छोटा समझना सबसे बड़ी भूल है। शत्रु चाहे कितना भी कमजोर क्यों न हो, उसे हल्के में न लें। अपनी आंखें और कान खुले रखें। शत्रु की गतिविधियों पर नजर रखना और उसके अगले कदम का अनुमान लगाना ही आपको सुरक्षित और सफल रखता है।

विद्या ही सबसे बड़ी शक्ति है
आचार्य चाणक्य के अनुसार, ज्ञान एक ऐसा धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता और न ही यह खर्च करने पर कम होता है। एक विद्वान व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है। शिक्षा और ज्ञान आपको कठिन से कठिन परिस्थितियों में रास्ता दिखाने का सामर्थ्य रखते हैं। चाणक्य स्वयं एक शिक्षक थे, इसलिए वे मानते थे कि ज्ञान के बल पर एक साधारण बालक को भी चक्रवर्ती सम्राट बनाया जा सकता है।

अच्छे और सच्चे मित्रों का चयन 
इंसान की पहचान उसकी संगति से होती है। चाणक्य ने मित्रों के चयन को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। ऐसे मित्रों से दूर रहें जो आपके मुंह पर मीठी बातें करते हों और पीठ पीछे आपको नुकसान पहुंचाते हों। वे उस घड़े के समान हैं जिसके मुख पर दूध है लेकिन अंदर विष भरा है। सच्चे मित्र वही हैं जो संकट के समय आपके साथ खड़े रहें और आपको गलत रास्ते पर जाने से रोकें।

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