Edited By Niyati Bhandari,Updated: 26 Sep, 2023 10:06 AM

यूनानी दार्शनिक प्लैटो के पास हमेशा विद्वानों का जमघट लगा रहता था। सभी उनसे कुछ न कुछ ज्ञान प्राप्त करके जाया करते थे, हालांकि स्वयं प्लैटो खुद को
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यूनानी दार्शनिक प्लैटो के पास हमेशा विद्वानों का जमघट लगा रहता था। सभी उनसे कुछ न कुछ ज्ञान प्राप्त करके जाया करते थे, हालांकि स्वयं प्लैटो खुद को कभी भी ज्ञानी नहीं मानते थे।

एक दिन उनके एक मित्र ने कहा, “आपके पास दुनिया के बड़े-बड़े विद्वान कुछ न कुछ सीखने और जानने आते हैं और आपसे बातें करके अपना जीवन धन्य समझते हैं। किंतु आपकी एक बात मेरी समझ में नहीं आती।”
प्लैटो बोले, “तुम्हें किस बात पर शंका है?”

इस पर मित्र बोला, “आप स्वयं इतने बड़े दार्शनिक और विद्वान हैं, लेकिन फिर भी आप दूसरों से शिक्षा ग्रहण करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं, वह भी बड़े उत्साह के साथ। सबसे बड़ी बात यह है कि आपको साधारण व्यक्ति से सीखने में भी झिझक नहीं होती। आपको सीखने की भला क्या जरूरत है ? कहीं आप लोगों को खुश करने के लिए उनसे सीखने का दिखावा तो नहीं करते ?”
मित्र की बात पर प्लैटो जोर से हंसे और फिर उन्होंने कहा, “हर किसी के पास कुछ न कुछ ऐसी चीज है जो दूसरों के पास नहीं। इसलिए हर किसी को हर किसी से सीखना चाहिए।”
