Jagannath Puri: 23 जून तक भगवान को लगेगा औषधि का भोग

Edited By Updated: 07 Jun, 2020 01:03 PM

jagannath puri latest god in quarantine for 15 days

इंसान तो बीमार होते हैं, मगर क्या आपने कभी ये सुना है कि भगवान बीमार हो जाएं। हम जानते हैं आप में से बहुत से लोगों को हमारे द्वारा लिखा गई बात शायद पसंद नहीं आई होगी।

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इंसान तो बीमार होते हैं, मगर क्या आपने कभी ये सुना है कि भगवान बीमार हो जाएं। हम जानते हैं आप में से बहुत से लोगों को हमारे द्वारा लिखा गई बात शायद पसंद नहीं आई होगी। बल्कि कुछ लोग तो गुस्से में आकर हमें बुरा-भला भी कहने लगे होंगे। दरअसल ऐसा केवल वो लोग करेंगे जिन्हें भगवान जगन्नाथ के स्नान करने पर बीमार होने का तथ्य अभी तक नहीं पता होगा। जी हां, ये वाक्य सत्य है। असल में जगन्नाथ पुरी में रथ यात्रा से पूर्व होने वाले पूर्णिमा स्नान के लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा देवी की प्रतिमाओं को गर्भगृह से बाहर लाया गया। बताया जा रहा है करीबन 17 पुजारियों ने घड़ों के सुगंधित जल से भगवान को स्नान करवाया। 
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जिसके बाद 15 दिन के लिए भगवान को भी क्वारंटाइन कर दिया गया है। यानि भगवान को एकांतवास में रहने वाला होगा। बता दें अब 23 जून को रथयात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ को एकांतवास से बाहर लाया जाएगा। मगर तक तक के लिए मंदिर के कपाट लिए बंद रहेंगे। अब आप में से कुछ लोग यकीनन ये सोच रहे होंगे कि शायद ये इस बार कोरोना की वजह से हुआ है तो बता दें ऐसा नहीं है, यहां ये परंपरा हर साल रथयात्रा से निभाई जाती है। 

मगर क्यों? क्या आपके पास इसका उत्तर है? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के हर वर्ष क्वारंटाइन होते हैं यानि एकांतवास में चले जाते हैं।
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दरअसल इससे जुड़़ी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार हर वर्ष पूर्णिमा स्नान के दौरान ज्यादा पानी से स्नान करने के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं। जिस कारण उन्हें एकांत में रखकर औषधियों से उनका इलाज किया जाता है। बता दें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा केपूर्णिमा स्नान के लिए जल मंदिर की उत्तर दिशा में निर्मित कुएं से लिया जाता है। कहा जाता है इस कुएं की खास बात ये है कि पूरे वर्ष में केवल एक बार पूर्णिमा स्नान के दिन ही यहां से पानी लिया जाता है। बताते चलें कि इस कुएं की इस ही विशेषता के कारण इसे गरबदु सेवादार'सोना कुआं यानि स्वर्ण कुआं कहा जाता है। 

इस स्नान के दौरान भगवान बलभद्र को 33 घड़ों के जल से स्नान कराया गया, भगवान जगन्नाथ को 35 घड़ों के जल से स्नान कराया गया, देवी सुभद्रा को 22 घड़ों के जल से और भगवान सुदर्शन को 18 घड़ों के जल से स्नान कराया गया। मगर इस दौरान यहां जिस चीज़ की कमी खली वो थी 'हरि बोल का उद्घोष करने वाली श्रद्धालुओं की भीड़। 
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बता दें कि पूर्णिमा स्नान में शामिल होने वाले सभी 170 पुजारियों को भी 12 दिन पहले से कोरोना टेस्ट के बाद से होम क्वारेंटाइन किया गया था जिसके बाद वे क्वारंटाइन से निकलकर सीधे मंदिर पहुंचे।

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