Edited By Sarita Thapa,Updated: 17 Jan, 2026 12:38 PM

अक्सर हमारे बड़े-बुजुर्ग टोकते हुए कहते हैं "हमेशा अच्छा बोलो, क्या पता किस घड़ी मां सरस्वती जुबान पर बैठी हों" यह महज एक कहावत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में रची-बसी एक गहरी आध्यात्मिक मान्यता है।
Juban Par Kab Baitti hai Saraswati : अक्सर हमारे बड़े-बुजुर्ग टोकते हुए कहते हैं "हमेशा अच्छा बोलो, क्या पता किस घड़ी मां सरस्वती जुबान पर बैठी हों" यह महज एक कहावत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में रची-बसी एक गहरी आध्यात्मिक मान्यता है। माना जाता है कि 24 घंटे के चक्र में एक ऐसा रहस्यमयी और पवित्र पल आता है, जब विद्या और वाणी की अधिष्ठात्री देवी, मां सरस्वती, साक्षात मनुष्य की जिह्वा पर विराजमान होती हैं। उस विशेष क्षण में हमारे मुख से निकला हर शब्द चाहे वह कोई दुआ हो, कोई सपना हो या अनजाने में कही गई कोई कड़वी बात हो ब्रह्मांड की शक्ति से जुड़कर हकीकत का रूप ले लेता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वह समय कौन सा है। शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार, दिन का एक विशेष पहर ऐसा होता है जब विद्या और वाणी की देवी मां सरस्वती साक्षात मनुष्य की जीभ पर विराजमान होती हैं। तो आइए जानते हैं कि दिन का वह कौन सा समय है जब आपको अपनी सोच और शब्दों पर सबसे ज्यादा पहरा देने की जरूरत है।
कब होता है मां सरस्वती का आगमन ?
शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त और उसके आस-पास का समय सबसे शक्तिशाली माना जाता है। सुबह 3:20 से 3:40 के बीच: कई विद्वानों का मानना है कि यह 20 मिनट का समय सबसे सटीक होता है। सूर्योदय से पहले का वह समय जब प्रकृति पूरी तरह शांत और शुद्ध होती है, तब सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है।
24 घंटे में एक बार का नियम
एक अन्य मान्यता के अनुसार, पूरे 24 घंटों में 1 बजकर 10 मिनट से लेकर 1 बजकर 15 मिनट तक चाहे वह दिन हो या रात का समय भी मां सरस्वती के आगमन का माना जाता है। हालांकि, अधिकांश लोग सुबह के शांत समय 3 और 6 बजे को ही सबसे प्रभावशाली मानते हैं।

इस समय क्या करना चाहिए ?
सकारात्मक बोलें
कोशिश करें कि दिन भर, विशेषकर सुबह उठते ही किसी के बारे में बुरा न बोलें।
लक्ष्य की घोषणा
यदि आपका कोई बड़ा सपना है, तो उसे सुबह के समय दोहराएं। माना जाता है कि उस समय ब्रह्मांड आपकी बातों को स्वीकार कर रहा होता है।
अपशब्दों से बचें
कभी भी गुस्से में आकर खुद को या दूसरों को बद्दुआ न दें, क्योंकि यदि वह सरस्वती के आगमन का पल हुआ, तो वह बात सच हो सकती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
अगर इसे तर्क से देखें, तो सुबह का समय हमारा अवचेतन मन सबसे ज्यादा सक्रिय होता है। उस समय हम जो बोलते हैं या सोचते हैं, हमारा मस्तिष्क उसे सच मानने लगता है और उसे पूरा करने के लिए हमें प्रेरित करता है। इसे ही आधुनिक भाषा में Law of Attraction भी कहा जाता है।

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