Shankaracharya Controversy : प्रशासन, परंपरा और न्यायिक प्रक्रिया में उलझे शंकराचार्य

Edited By Updated: 28 Jan, 2026 08:08 AM

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Shankaracharya Controversy : माघ मेले की धार्मिक आस्था से शुरू हुआ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का विवाद अब साधु-संत समाज, प्रशासन और राजनीति के त्रिकोण में फंसता जा रहा है। मौनी अमावस्या के स्नान से पहले जिस विवाद ने जन्म लिया, वह...

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Shankaracharya Controversy : माघ मेले की धार्मिक आस्था से शुरू हुआ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का विवाद अब साधु-संत समाज, प्रशासन और राजनीति के त्रिकोण में फंसता जा रहा है। मौनी अमावस्या के स्नान से पहले जिस विवाद ने जन्म लिया, वह महज़ एक व्यवस्थागत विवाद नहीं रह गया, बल्कि शंकराचार्य पद की वैधता, प्रशासन की भूमिका और सत्ता-धर्म संबंधों पर एक बड़ी बहस में तब्दील हो चुका है। फिलहाल मामला प्रशासनिक आदेशों, धार्मिक परंपराओं और न्यायिक प्रक्रिया के बीच उलझ चुका है। शंकराचार्य पद की वैधता पर अदालत का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है, वहीं प्रशासन अपने फैसलों को कानून-व्यवस्था और व्यवस्था प्रबंधन से जोड़कर देख रहा है। संत समाज भी स्पष्ट रूप से एक मत नहीं है। कुछ संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ खड़े हैं तो कुछ दूरी बनाए हुए हैं।

 धार्मिक आयोजनों में प्रशासनिक भूमिका, संतों की गरिमा और राजनैतिक हस्तक्षेप, तीनों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। 
अविमुक्तेश्वरानंद दस दिनों से त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर के बाहर पालकी पर बैठे हैं। वह मेला प्रशासन से ससम्मान गंगा स्नान कराने की मांग कर रहे है। मौनी अमावस्या पर पालकी के साथ स्नान करने संगम नोज जा रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन ने रोका था। इसके बाद बिना संगम स्नान के ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शिविर वापस लौट आए थे, तब से वह शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं।

शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन: उमा भारती 
मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मंगलवार को भोपाल में कहा कि किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखने की नसीहत देते हुए भारती ने उम्मीद जताई कि जल्द ही शंकराचार्य विवाद का कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा।  उमा भारती ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा। किंतु प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांग कर प्रशासन ने मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है।’

माघ मेला राजनीति का अखाड़ा नहीं: रामानुजाचार्य
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ प्रशासन द्वारा कथित दुर्व्यवहार के बाद साधु-संत दो गुटों में बंट गए हैं। इस विवाद पर श्रृंगवेरपुर धाम के पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी शांडिल्य महाराज ने कहा कि माघ मेला क्षेत्र एक पवित्र तीर्थ स्थल है, न कि राजनीति का अखाड़ा। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि बटुकों के साथ मारपीट निंदनीय है। इस पूरे मामले को अब राजनैतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई कथित अभद्र टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लगातार सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। उनके खिलाफ इस प्रकार की अपमानजनक भाषा का प्रयोग अत्यंत निंदनीय है। एक विशेष वर्ग को खुश करने के उद्देश्य से की गई ऐसी टिप्पणियों के लिए संबंधित लोगों को माफी मांगनी चाहिए।

अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में संतों ने शुरू की धूनी साधना 
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अनशन के समर्थन में मंगलवार को साधु संतों ने एक अनूठी साधना शुरू कर दी है। महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा की अगुवाई में बड़ी संख्या में संतों ने शिविर के सामने धूनी साधना शुरू कर दिया है। वैष्णव संत वसंत पंचमी से गंगा दशहरा तक अपने चारों तरफ आग जलाकर कठिन तपस्या करते हैं, इसे धूनी तापना कहते हैं। धूनी तापकर संतों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का समर्थन किया। संतों ने चेतावनी दी है कि अविमुक्तेश्वरानंद को गंगा स्नान के लिए ससम्मान ले जाए तभी धरना खत्म होगा।
 

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