Singh Sankranti 2026 Date : कब है सिंह संक्रांति 2026? जानें सूर्य गोचर का समय और पूजा का महत्त्व

Edited By Updated: 16 Aug, 2026 12:19 PM

singh sankranti 2026 date

हिंदू धर्म में कुल 12 संक्रांति मनाई जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, सूर्य का एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करना संक्रांति कहलाता है। सूर्य हर महीने अपनी राशि बदलते हैं, इसलिए पूरे वर्ष में 12 संक्रांतियां होती हैं।

Singh Sankranti 2026 Date : हिंदू धर्म में कुल 12 संक्रांति मनाई जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, सूर्य का एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करना संक्रांति कहलाता है। सूर्य हर महीने अपनी राशि बदलते हैं, इसलिए पूरे वर्ष में 12 संक्रांतियां होती हैं। जब सूर्य देव कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करते हैं, तो इस तिथि को सिंह संक्रांति के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा माना जाता है। अपने घर में सूर्य देव के गोचर करने से इस दिन उनकी पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन सच्चे मन से और विधि-विधान के साथ सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में आने वाली हर परेशानी से छुटकारा मिलता है और मन की हर मनोकामना पूरी होती है। तो आइए जानते हैं सिंह संक्रांति के शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में- 

Singh Sankranti 2026 Date

सिंह संक्रांति  शुभ मुहूर्त
17 अगस्त 2026 यानी सिंह संक्रांति के दिन सूर्योदय सुबह 05 बजकर 51 मिनट पर होगा, जिससे पहले ब्रह्म मुहूर्त का आरंभ हो जाएगा। इस दिन सुबह 04 बजकर 24 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 08 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। वहीं, प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 04 बजकर 46 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 51 मिनट तक है।

सिंह संक्रांति के दिन पुण्य काल का समय
शास्त्रों में संक्रांति के दिन पुण्य काल और महा पुण्य काल के दौरान स्नान, दान और पूजन का विशेष फल बताया गया है। इस निर्धारित समय अवधि में सूर्य देव की उपासना और दान-पुण्य करने से अक्षय शुभ फल की प्राप्ति होती है।

पुण्य काल मुहूर्त: प्रात 05 बजकर 51 मिनट से सुबह 08 बजकर 04 मिनट तक। 
 
महा पुण्य काल मुहूर्त: प्रातः 05 बजकर 52 मिनट से सुबह 08 बजकर 04 मिनट तक।

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सिंह संक्रांति महत्व 
सिंह राशि का स्वामी स्वयं सूर्य है। इस गोचर से व्यक्ति के नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और मान-सम्मान में सकारात्मक बढ़ोतरी होती है। इस दिन स्नान-दान के साथ-साथ पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध कार्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। भगवान सूर्य की आराधना से पुरानी बीमारियों और शारीरिक दुर्बलता से राहत मिलती है, साथ ही शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।

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