Edited By Sarita Thapa,Updated: 17 Jan, 2026 10:34 AM

अयोध्या में राम लला के विराजमान होने के बाद अब बिहार का चंपारण पूरी दुनिया के लिए आस्था का केंद्र बन गया है। आज, 17 जनवरी 2026 को विराट रामायण मंदिर के गर्भगृह में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की विधि-विधान से स्थापना की जा रही है।
Virat Ramayan Mandir Shivling Sthapana : अयोध्या में राम लला के विराजमान होने के बाद अब बिहार का चंपारण पूरी दुनिया के लिए आस्था का केंद्र बन गया है। आज, 17 जनवरी 2026 को विराट रामायण मंदिर के गर्भगृह में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की विधि-विधान से स्थापना की जा रही है। इस शिवलिंग की भव्यता किसी को भी अचंभित कर सकती है। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा है और इसका वजन 210 टन है।
इसे सहस्रलिंगम कहा जाता है क्योंकि मुख्य शिवलिंग की संरचना के भीतर 1000 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं। मान्यता है कि इसके एक बार दर्शन करने से एक साथ एक हजार शिवलिंगों की पूजा का फल प्राप्त होता है। इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम से विशेष ग्रेनाइट पत्थर से तैयार कराया गया है।
1072 देवताओं का महासंगम
यह मंदिर केवल शिव पूजा तक सीमित नहीं है। यहाँ मुख्य शिवलिंग के साथ 1072 अन्य देवी-देवताओं की भी स्थापना की जा रही है। यह भव्य परिसर शैव और वैष्णव परंपराओं के मिलन का प्रतीक है, जहां भक्त एक ही छत के नीचे सनातन धर्म के विशाल स्वरूप का दर्शन कर सकेंगे।
17 जनवरी का ही दिन क्यों ?
स्थापना के लिए 17 जनवरी की तारीख को बहुत सोच-समझकर चुना गया है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को सृष्टि के कल्याण के लिए भगवान शिव पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसलिए, किसी भी बड़े शिवलिंग की स्थापना के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। आज शनिवार होने के कारण शनि प्रदोष का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो शिव भक्तों के लिए विशेष फलदायी और कष्टों का निवारण करने वाला है।
कंबोडिया के अंकोरवाट से भी बड़ी पहचान
विराट रामायण मंदिर का लक्ष्य दुनिया के सबसे बड़े मंदिर के रूप में पहचान बनाना है। इसकी बनावट कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर से प्रेरित है, लेकिन इसकी ऊंचाई और भव्यता उसे भी पीछे छोड़ देगी।
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