प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं अमेरिका के साथ कैसा रवैया अपनाना चाहिए : पूर्व राजनयिक श्रीनिवासन

Edited By Updated: 24 May, 2023 04:13 PM

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(ललित के झा) वाशिंगटन, 24 मई (भाषा) एक पूर्व वरिष्ठ भारतीय राजनयिक ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन में भारत और अमेरिका ‘बेहतर संबंधों’ के लिए तैयार हैं, क्योंकि उन्हें (मोदी को) देश के राष्ट्रीय हितों की गहरी समझ है और...

(ललित के झा) वाशिंगटन, 24 मई (भाषा) एक पूर्व वरिष्ठ भारतीय राजनयिक ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन में भारत और अमेरिका ‘बेहतर संबंधों’ के लिए तैयार हैं, क्योंकि उन्हें (मोदी को) देश के राष्ट्रीय हितों की गहरी समझ है और वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के समय से ही यह बेहतर ढंग से जानते हैं कि वाशिंगटन के साथ कैसा रवैया अपनाया जाना चाहिए।

वर्ष 1997 से 2000 तक अमेरिका में भारत के उप-राजदूत रहे टी पी श्रीनिवासन ने प्रधानमंत्री मोदी के जून में प्रस्तावित वाशिंगटन दौरे से पहले यह टिप्पणी की। मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उनकी पत्नी जिल बाइडन के निमंत्रण पर जून में वाशिंगटन की पहली आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। बाइडन दंपती मोदी के सम्मान में 22 जून को राजकीय भोज भी देंगे।

जापान के हिरोशिमा में जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर मोदी और बाइडन के बीच हाल में हुए संवाद का जिक्र करते हुए श्रीनिवासन ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्तों के काफी बेहतर दिन आने वाले हैं।

उन्होंने कहा, “जैसा कि हमने हिरोशिमा में देखा, उनके बीच अच्छे समीकरण हैं। और ऐसा लगता है कि वे बेहतर रिश्तों के लिए तैयार हैं।” पूर्व राजनयिक ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को तीन मुद्दे प्रभावित कर रहे हैं, पहला-चीन, दूसरा-यूक्रेन-रूस युद्ध और तीसरा-भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट।

भारत शुरुआत से ही कहता आ रहा है कि यूक्रेन संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिये किया जाना चाहिए। दोनों देशों के बीच भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर अमेरिकी रिपोर्ट को लेकर भी मतभेद हैं।

श्रीनिवासन ने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि ये तीनों मुद्दे रिश्तों में कड़वाहट घोलेंगे, लेकिन इनसे संबंध प्रभावित हो रहे हैं और दोनों देशों को इसी मुद्दे पर बैठकर बात करनी होगी और आपसी समझ बनाने की कोशिश करनी होगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के आंतरिक मामले भारत-अमेरिका संबंध निर्धारित करने वाले कारकों में नहीं होने चाहिए।



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