Edited By Tanuja,Updated: 09 Apr, 2026 07:23 PM

ईरान-अमेरिका शांति वार्ता से पहले इज़राइल ने पाकिस्तान पर अविश्वास जताया है। इज़राइली राजदूत ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है। यह बयान इस्लामाबाद में होने वाली अहम बातचीत से पहले आया है, जिससे कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अहम शांति वार्ता से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारत में इज़राइल के राजदूत रूवेन अज़ार (Reuven Azar) ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें Pakistan पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान “आतंकवाद को समर्थन देने वाला देश” है, इसलिए उस पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इज़राइल इस मामले में अपने अमेरिकी सहयोगियों पर निर्भर करेगा। दरअसल, पाकिस्तान इस समय अमेरिका और Iran के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच अहम बातचीत होने वाली है। इस बैठक का मकसद हाल ही में हुए दो हफ्ते के सीजफायर को मजबूत करना और स्थायी शांति का रास्ता निकालना है।
VIDEO | Israeli Ambassador to India Reuven Azar (@ReuvenAzar) says, "We don't trust Pakistan as it sponsors terrorism; relying on our American friends to address situation."
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/xHCMnAx0OY
— Press Trust of India (@PTI_News) April 9, 2026
ईरान ने संकेत दिया है कि वह अपनी 10 सूत्रीय योजना के आधार पर बातचीत करेगा, जिसमें प्रतिबंधों में राहत, भविष्य में हमलों की गारंटी और Strait of Hormuz से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही गहरा अविश्वास बना हुआ है। खासतौर पर लेबनान में जारी हमलों और सीजफायर उल्लंघन के आरोपों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इज़राइल के इस बयान से साफ है कि वह पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को स्वीकार नहीं कर रहा है। इससे शांति वार्ता से पहले ही कूटनीतिक माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ (mediator) के रूप में पेश कर रहा है और इस्लामाबाद में शांति वार्ता आयोजित की जा रही है। इज़राइल का यह रुख इस बात की ओर इशारा करता है कि वह पाकिस्तान की भूमिका को निष्पक्ष नहीं मानता। माना जा रहा है कि इज़राइल को डर है कि पाकिस्तान इस प्रक्रिया में पूरी तरह तटस्थ नहीं है और उसके अपने रणनीतिक हित हो सकते हैं। यह बयान मिडिल ईस्ट की राजनीति में और तनाव पैदा कर सकता है, क्योंकि पहले ही Iran और इज़राइल के बीच टकराव जारी है। ऐसे में अगर मध्यस्थ पर ही सवाल उठने लगें, तो शांति वार्ता की सफलता पर भी असर पड़ सकता है।