मोदी सरकार के आर्थिक विकास के आंकड़ों की विश्वसनीय पर सवाल: कांग्रेस

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 05:32 PM

congress questions the credibility of the modi government s economic growth

कांग्रेस ने देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति और "बढ़ती असमानता" को चिंताजनक करार देते हुए मंगलवार को दावा किया कि सरकार के आर्थिक विकास के आंकड़ों की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आ गई है। कांग्रेस के शोध विभाग के प्रमुख राजीव गौड़ा और पार्टी के संचार...

नेशनल डेस्क: कांग्रेस ने देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति और "बढ़ती असमानता" को चिंताजनक करार देते हुए मंगलवार को दावा किया कि सरकार के आर्थिक विकास के आंकड़ों की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आ गई है। कांग्रेस के शोध विभाग के प्रमुख राजीव गौड़ा और पार्टी के संचार विभाग के शोध मामले के प्रभारी अमिताभ दुबे ने अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर एक पुस्तिका जारी की और कहा कि देश को आज सुर्ख़ियों की नहीं, ईमानदार आंकड़ों की जरूरत है।

रिपोर्ट जारी करते हुए गौड़ा ने कहा: "अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति मोदी सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करती है। ऐसे समय में जब असमानता बद से बदतर हो रही है, कॉर्पोरेट मुनाफा बढ़ रहा है, सार्थक रोजगार सृजन नहीं हो रहा है, तो मोदी सरकार कल्याण में कटौती करने पर अड़ी हुई है।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक बयान का हवाला देते हुए कहा, "यह सरकार गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं - चार "जातियों" के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच को खत्म कर रही है।

इसके अलावा, भारत के डेटा की विश्वसनीयता पर व्यापक रूप से सवाल उठाए जा रहे हैं। भारत को ईमानदार आंकड़ों की जरूरत है और एक समावेशी विकास मॉडल जो रोजगार पैदा करता है, न कि केवल सुर्खियां। मोदी सरकार का प्रचार हमें पूर्ववर्ती एनडीए सरकार के ' भारत उदय' वाले अहंकार की याद दिलाता है।" अमिताभ दुबे ने कहा, "जिस विकास से केवल कुछ लोगों को लाभ होता है, वह सफलता नहीं है। यह एक चेतावनी संकेत है। बढ़ती असमानता और सिमटता जन कल्याण बड़े पैमाने पर आर्थिक कुप्रबंधन के स्पष्ट संकेतक हैं।

लेकिन मूल रूप से अच्छी नीति ईमानदार डेटा से शुरू होती है।" उन्होंने कहा, "हम सरकार से देश के सामने वास्तविक आंकड़े रखने के लिए कहते हैं, न कि लोगों को गुमराह करने वाले हेरफेर किए गए आंकड़े।" रिपोर्ट में कहा गया है, "सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों का राष्ट्रीय आय के 58 प्रतिशत हिस्से पर कब्ज़ा है। निचले आधे हिस्से को केवल 15 प्रतिशत मिलता है। शीर्ष 10 प्रतिशत के पास भारत की 65 प्रतिशत संपत्ति है। निचले आधे हिस्से का स्वामित्व सिर्फ 6.4 प्रतिशत है, शीर्ष एक प्रतिशत के पास 40 प्रतिशत संपत्ति है।"

कांग्रेस ने दावा किया कि हर 5 में से 4 भारतीय 200 रूपये प्रति दिन पर गुजारा करते हैं और एक तिहाई आबादी 100 रूपये प्रति दिन पर गुजारा करने को विवश है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है। इसमें कहा गया है कि आईएमएफ ने भारत के आंकड़ों को "सी" ग्रेड दिया है। मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि इस सरकार में युवाओं के भविष्य को बर्बाद किया जा रहा है। 

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