Edited By Radhika,Updated: 09 Apr, 2026 06:38 PM

मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण भारत के ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। देश की सबसे बड़ी निजी रिफाइनर कंपनी, Reliance Industries Limited (RIL) ने अपने रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन की बिक्री को सीमित करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के...
नेशनल डेस्क: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण भारत के ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। देश की सबसे बड़ी निजी रिफाइनर कंपनी, Reliance Industries Limited (RIL) ने अपने रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन की बिक्री को सीमित करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राहकों को एक बार में केवल 1000 रुपये (लगभग $11) तक का ही पेट्रोल या डीजल दिया जा रहा है।
Jio-BP पंपों पर पाबंदी
रिलायंस और बीपी (BP) के संयुक्त उद्यम के देशभर में 2,000 से अधिक पेट्रोल पंप हैं। सूत्रों के अनुसार, हालांकि कंपनी ने कोई औपचारिक लिखित आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन पंप ऑपरेटरों को मौखिक रूप से निर्देश दिए गए हैं कि वे व्यक्तिगत बिक्री को 1,000 रुपये तक सीमित रखें। इसका मुख्य उद्देश्य 'पैनिक बाइंग' यानि की घबराहट में खरीदारी को रोकना और स्टॉक खत्म होने से बचाना है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
भारत अपनी जरूरत का 90% से अधिक तेल आयात करता है। Strait of Hormuz, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का मुख्य मार्ग है, हफ्तों से लगभग बंद पड़ा है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्धविराम हुआ है, लेकिन टैंकरों की आवाजाही अभी भी बाधित है और बीमा कंपनियां इस क्षेत्र को 'हाई-रिस्क' मान रही हैं।

सरकारी और अन्य निजी कंपनियों का हाल
सरकारी कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अब तक आधिकारिक तौर पर कोई सीमा नहीं लगाई है, लेकिन कई ड्राइवरों ने कुछ पंपों पर 1,000 रुपये की अनौपचारिक सीमा लागू होने की बात कही है। रूस की रोसनेफ्ट के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने घाटे को कम करने और खपत को नियंत्रित करने के लिए पिछले महीने ही कीमतों में बढ़ोतरी कर दी थी।
भारी घाटे में तेल कंपनियां
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में ईंधन की खुदरा बिक्री पर कंपनियां भारी घाटा उठा रही हैं। 1 अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनियों को पेट्रोल पर 24.40 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 104.99 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। आखिरी बार सरकारी रिफाइनरियों ने मार्च 2024 में कीमतों में कटौती की थी।