UGC के नए नियमों के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज , सामान्य वर्ग के खिलाफ 'भेदभाव' का आरोप

Edited By Updated: 29 Jan, 2026 04:18 AM

the supreme court will hear a petition against the new ugc regulations today

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में विवाद बढ़ता जा रहा है। खासतौर पर सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के छात्रों और युवाओं में इन नियमों को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया...

नेशनल डेस्कः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में विवाद बढ़ता जा रहा है। खासतौर पर सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के छात्रों और युवाओं में इन नियमों को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है।

UGC के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच आज गुरुवार (29 जनवरी 2026) को सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने के बाद इस मुद्दे पर सियासी और शैक्षणिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

याचिका में क्या कहा गया है?

याचिका में दावा किया गया है कि UGC के नए नियम जातिगत भेदभाव खत्म करने के नाम पर सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियमों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए जातिगत भेदभाव की शिकायत दर्ज कराने की स्पष्ट व्यवस्था की गई है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों को इस दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया है कि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वालों के खिलाफ किसी तरह की सजा या कार्रवाई का प्रावधान नहीं किया गया है। जिससे इन नियमों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है.

क्या है UGC का नया “समानता नियम”?

UGC ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन रेगुलेशंस, 2026” को लागू कर दिया है। UGC के अनुसार, इस नियम का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना, छात्रों और कर्मचारियों को समान अवसर देना और शैक्षणिक माहौल को सुरक्षित और समावेशी बनाना बताया गया है। इस नियम की सबसे अहम बात यह है कि अब SC और ST के साथ-साथ OBC वर्ग को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है।

नए नियमों के तहत क्या-क्या करना होगा?

UGC के नियमों के अनुसार, हर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre) बनाना अनिवार्य होगा। भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष समितियां गठित करनी होंगी। छात्रों और कर्मचारियों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू करनी होगी और तय समयसीमा के भीतर शिकायतों पर कार्रवाई करनी होगी।

UGC के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?

नियम लागू होते ही देश के कई हिस्सों में सवर्ण समाज से जुड़े संगठन, कुछ छात्र संगठन और शिक्षक संघ इसके विरोध में सामने आ गए हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि नियम सभी वर्गों के लिए संतुलित नहीं हैं। इससे शिक्षण संस्थानों में डर और अविश्वास का माहौल बन सकता है और झूठे आरोप लगाकर छात्रों और शिक्षकों को परेशान किया जा सकता है। यही वजह है कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है और आज की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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