Edited By Niyati Bhandari,Updated: 24 Sep, 2023 09:21 AM

ग्लेन कनिंघम और फ्लॉयड सगे भाई थे। बात 1917 की है। तब ग्लेन 7 और फ्लॉयड 13 वर्ष के थे। दोनों अमरीका में एक स्कूल में रहते थे। सर्दियों
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Inspirational Story: ग्लेन कनिंघम और फ्लॉयड सगे भाई थे। बात 1917 की है। तब ग्लेन 7 और फ्लॉयड 13 वर्ष के थे। दोनों अमरीका में एक स्कूल में रहते थे। सर्दियों में उनका काम विद्यार्थियों के आने से पहले कोयला जलाकर क्लास को गरम करना था। कोयले को वे लकड़ी से और लकड़ी को कैरोसिन से जलाते थे। एक दिन गलती से कैरोसिन के डिब्बे में पैट्रोल भर दिया गया। इससे अनजान फ्लॉयड ने सुबह पैट्रोल से भीगी लकड़ी जलाने के लिए माचिस जलाई तो आग ने दोनों भाइयों को अपनी चपेट में ले लिया।
अस्पताल में इलाज के दौरान बड़े भाई फ्लॉयड ने दम तोड़ दिया। ग्लेन किसी तरह बच तो गया, लेकिन डाक्टरों ने कहा कि उसकी टांग काटनी होगी। आग में उसकी मांसपेशियां और हड्डियां बुरी तरह जल चुकी थीं। फिर भी मां बेटे का पैर कटवाने को राजी नहीं हुई। डाक्टरों ने हार मानी थी, लेकिन मां ने नहीं। घर लाकर वह खुद ही ग्लेन की मरहम-पट्टी करने लगी। कुछ दिनों बाद उसके लकड़ी जैसे बन चुके पैरों की मालिश शुरू की। यह काम मां दो साल तक लगातार करती रही।

दो साल बाद ग्लेन को लगा कि वह चल सकता है। वह सहारा लेकर पैर को घसीटते हुए चलने लगा। दृढ़ निश्चय और पक्के इरादे के कारण एक दिन पैर घसीटते हुए वह स्कूल तक पहुंच गया। स्कूल आते-जाते उसकी चाल दौड़ में बदली। दौड़ तेज हुई तो वह स्कूल का श्रेष्ठ धावक बना।
बालक यहीं नहीं रुका, आगे चलकर अपने शहर का श्रेष्ठ धावक और ओलिंपिक का कांस्य पदक विजेता बना। शारीरिक शिक्षण में शिक्षक बनकर आजीवन बच्चों का उत्साहवर्धन किया। स्कूल खोलकर निराश बच्चों का रोल मॉडल बना।
