पहाड़ पर टहलने के दौरान दो दोस्तों को मिला बेशकीमती खजाना, कीमत जान उड़ जाएंगे आपके होश

Edited By Updated: 28 May, 2025 11:41 PM

two friends found a priceless treasure while walking on a mountain

किस्मत कब, कहां और किस रूप में बदल जाए, यह कोई नहीं जानता। कुछ ऐसा ही रोमांचक और चौंकाने वाला वाकया चेक गणराज्य के क्रकोनोसे पर्वतों में सामने आया, जहां दो दोस्तों को पहाड़ी पगडंडी पर टहलते हुए एक रहस्यमयी एल्युमिनियम का बक्सा मिला।

इंटरनेशनल डेस्कः  किस्मत कब, कहां और किस रूप में बदल जाए, यह कोई नहीं जानता। कुछ ऐसा ही रोमांचक और चौंकाने वाला वाकया चेक गणराज्य के क्रकोनोसे पर्वतों में सामने आया, जहां दो दोस्तों को पहाड़ी पगडंडी पर टहलते हुए एक रहस्यमयी एल्युमिनियम का बक्सा मिला। जब उन्होंने उसे खोलकर देखा, तो आंखें फटी की फटी रह गईं – क्योंकि यह कोई मामूली बक्सा नहीं, बल्कि सोने के सिक्कों और गहनों से भरा खजाना था।


क्या-क्या मिला खजाने में?

बक्से के भीतर जो चीजें मिलीं, उन्होंने इतिहासकारों और पुरातत्वविदों की भी नींद उड़ा दी:

इन सभी वस्तुओं का कुल वजन करीब 15 पाउंड था, जिसमें सिर्फ सिक्कों का वजन ही 8.16 पाउंड (3.7 किलोग्राम) है।


कीमत कितनी है इस खजाने की?

संग्रहालय विशेषज्ञ वोज्टेक ब्रैडले के अनुसार, केवल इन सिक्कों की अनुमानित कीमत ही लगभग 360,000 डॉलर (करीब ₹3 करोड़) आंकी गई है। साथ ही अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं और धातुएं इस खजाने की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को और बढ़ा देती हैं।


कहां और कैसे मिला बक्सा?

  • घटना फरवरी 2025 की है।

  • दो दोस्त उत्तर-पूर्वी चेक गणराज्य के क्रकोनोसे पर्वतों में एक पत्थर की दीवार के पास से गुजर रहे थे।

  • वहीं से उन्हें यह एल्यूमिनियम का बक्सा दिखाई दिया, जो कुछ हिस्सा मिट्टी से बाहर निकला हुआ था।


क्या किया दोनों दोस्तों ने?

इन दोनों ईमानदार युवकों ने इस खजाने को अपने पास रखने के बजाय पूर्वी बोहेमिया संग्रहालय को सौंप दिया। स्थानीय प्रशासन और संग्रहालय ने उनके इस कदम की सराहना की और उनके लिए पुरस्कार की भी सिफारिश की है। चेक कानूनों के अनुसार, खोजकर्ता को खजाने की कीमत का 10% तक पुरस्कार मिल सकता है।


अब तक की जांच में क्या पता चला?

  • कुछ सिक्कों पर 1921 की तारीख दर्ज है।

  • कई सिक्के फ्रांस, ऑस्ट्रो-हंगरी, बेल्जियम और ऑटोमन साम्राज्य के हैं।

  • विशेषज्ञ मानते हैं कि ये खजाना 1910 से 1930 के बीच छिपाया गया हो सकता है – संभवतः विश्व युद्धों या मौद्रिक संकट के दौरान।

हालांकि, खजाने की असली उत्पत्ति और इसे छिपाने वाले व्यक्ति या परिवार के बारे में कोई ठोस जानकारी अब तक नहीं मिल पाई है।


पूरी दुनिया की नजरें इस खोज पर

यह खोज सिर्फ चेक गणराज्य ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप और दुनिया भर के इतिहासकारों, खजाना विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की उत्सुकता का केंद्र बन चुकी है। सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस खोज को "सदी की सबसे रोमांचक घटनाओं में से एक" बताया जा रहा है।

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