Edited By Anu Malhotra,Updated: 28 Feb, 2026 09:41 AM

किसी भी देश का झंडा महज कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी संप्रभुता, संघर्ष और करोड़ों लोगों की पहचान का आईना होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वक्त के साथ कई देश अपनी इस 'पहचान' को पूरी तरह बदल देते हैं? गुलामी की जंजीरें तोड़ने से लेकर अपनी...
नेशनल डेस्क: किसी भी देश का झंडा महज कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी संप्रभुता, संघर्ष और करोड़ों लोगों की पहचान का आईना होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वक्त के साथ कई देश अपनी इस 'पहचान' को पूरी तरह बदल देते हैं? गुलामी की जंजीरें तोड़ने से लेकर अपनी आधुनिक छवि गढ़ने तक, राष्ट्रध्वज बदलने के पीछे गहरी राजनीति और भावनाएं छिपी होती हैं। आइए समझते हैं कि एक नया झंडा अस्तित्व में कैसे आता है।
1. बदलाव की शुरुआत: कब उठती है मांग?
झंडा बदलने की प्रक्रिया रातों-रात शुरू नहीं होती। आमतौर पर जब किसी देश में बड़ा राजनीतिक तख्तापलट होता है, कोई देश आजादी हासिल करता है या फिर पुरानी औपनिवेशिक (Colonial) यादों को मिटाना चाहता है, तब सरकार या संसद में इसका प्रस्ताव लाया जाता है। जनता की मांग भी इस बदलाव का एक बड़ा कारण बनती है।
2. डिजाइन का चयन: कौन तय करता है नया चेहरा?
एक बार जब सरकार बदलाव पर मुहर लगा देती है, तो सबसे बड़ी चुनौती होती है-नया डिजाइन। इसके लिए अक्सर ये तरीके अपनाए जाते हैं:
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पब्लिक कॉम्पिटिशन: सरकार कलाकारों और आम जनता से डिजाइन आमंत्रित करती है ताकि देश की संस्कृति की झलक उसमें दिखे।
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विशेषज्ञ कमेटी: इसमें इतिहासकार, डिजाइनर और सरकारी अधिकारी शामिल होते हैं जो हजारों डिजाइनों में से सबसे सटीक विकल्प चुनते हैं।
3. जनमत संग्रह (Referendum): जनता की राय है सर्वोपरि
लोकतांत्रिक देशों में नया झंडा थोपा नहीं जाता। सरकारें अक्सर रेफरेंडम कराती हैं, जहाँ नागरिक वोट देकर चुनते हैं कि उन्हें नया झंडा चाहिए या पुराना ही ठीक है।
रोचक उदाहरण: साल 2015-16 में न्यूजीलैंड ने अपना झंडा बदलने के लिए नेशनल वोटिंग कराई थी, लेकिन वहां की जनता ने अंततः अपने पुराने झंडे को ही बनाए रखने का फैसला किया।
4. कानूनी मुहर और आधिकारिक घोषणा
डिजाइन फाइनल होने के बाद मामला संसद (Parliament) पहुंचता है। वहां एक विशेष कानून पास कर नए डिजाइन को 'राष्ट्रीय प्रतीक' घोषित किया जाता है। बिना कानूनी मंजूरी के कोई भी झंडा आधिकारिक नहीं माना जाता।
5. विदाई और स्वागत: जब फहराया जाता है नया परचम
मंजूरी मिलने के बाद एक भव्य आधिकारिक समारोह का आयोजन होता है। इसमें:
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पुराने झंडे को पूरे सम्मान के साथ उतारा जाता है।
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सरकारी इमारतों, सैन्य अड्डों और विदेशी दूतावासों पर नया झंडा फहराया जाता है।
इतिहास के पन्नों से: क्यों बदले गए झंडे?
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दक्षिण अफ्रीका (1994): रंगभेद (Apartheid) की समाप्ति के बाद एकता और सद्भाव को दर्शाने के लिए नया झंडा अपनाया गया।
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कनाडा (1965): ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रभाव से अलग अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने के लिए कनाडा ने 'मेपल लीफ' वाला नया ध्वज चुना।