क्या वायरस कभी मरते नहीं? जानिए कोरोना की दोबारा वापसी के पीछे के वैज्ञानिक कारण

Edited By Updated: 29 May, 2025 05:47 PM

do viruses never die

साल 2019-20 में पूरी दुनिया को झकझोर देने वाला कोरोना वायरस एक बार फिर चर्चा में है। कई देशों में कोविड-19 के नए मामले सामने आ रहे हैं। भारत सहित सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग में केस बढ़ रहे हैं।

नेशनल डेस्क: साल 2019-20 में पूरी दुनिया को झकझोर देने वाला कोरोना वायरस एक बार फिर चर्चा में है। कई देशों में कोविड-19 के नए मामले सामने आ रहे हैं। भारत सहित सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग में केस बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में फिर वही सवाल उठने लगे हैं क्या वायरस कभी मरते नहीं? और अगर मरते हैं तो कोरोना फिर क्यों लौट आया? आइए समझते हैं कि कोरोना वायरस की वापसी के पीछे क्या कारण हैं, यह वायरस कैसे काम करता है और हमें अब क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

वायरस क्या होते हैं और क्या ये मरते हैं?

वायरस को जीवित प्राणी नहीं माना जाता। ये खुद से कोई काम नहीं कर सकते। लेकिन जब ये किसी जीवित शरीर, जैसे इंसान या जानवर के शरीर में प्रवेश करते हैं, तब ये बहुत सक्रिय हो जाते हैं। ये कोशिकाओं के अंदर जाकर अपनी संख्या बढ़ाते हैं और बीमारी फैलाते हैं। अगर वायरस को कोई मेजबान (host) नहीं मिलता तो यह निष्क्रिय हो सकता है या खत्म भी हो सकता है। लेकिन कुछ वायरस, जैसे कोरोना वायरस, पर्यावरण में थोड़े समय तक जीवित रह सकते हैं और जैसे ही उन्हें नया मेजबान मिलता है, फिर से फैलना शुरू कर देते हैं।

कोरोना वायरस की वापसी के पीछे के कारण

1. वायरस में बदलाव यानी म्यूटेशन

कोरोना वायरस समय के साथ खुद को बदलता रहता है। इसे 'म्यूटेशन' कहा जाता है। जब वायरस अपने जीन में बदलाव करता है तो वह एक नया रूप ले लेता है जिसे वेरिएंट कहा जाता है।

अब तक के नए वेरिएंट्स में NB.1.8.1, LF.7 और भारत में सबसे ज्यादा पाया गया JN.1 शामिल हैं। JN.1 वेरिएंट भारत में लगभग 53% नए मामलों में पाया गया है। ये वेरिएंट पुराने वैक्सीन के असर को कमजोर कर सकते हैं जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

2. प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी का कम होना

वैक्सीन या पहले संक्रमण से जो इम्यूनिटी बनी थी वह समय के साथ कम हो जाती है। खासकर बुजुर्गों और बीमार लोगों में यह असर तेजी से कम होता है। अगर समय पर बूस्टर डोज नहीं ली जाए तो शरीर वायरस से लड़ने में कमजोर पड़ जाता है। सिंगापुर में देखा गया है कि जिन्होंने बूस्टर डोज नहीं ली, उनमें संक्रमण के मामले ज्यादा बढ़े।

3. लोगों की लापरवाही

जब केस कम हो जाते हैं तो लोग मास्क पहनना, हाथ धोना और सामाजिक दूरी जैसे नियमों का पालन करना बंद कर देते हैं। इससे वायरस को फैलने का एक और मौका मिल जाता है। दिल्ली और मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहरों में यह तेजी से फैलता है।

4. मौसम और यात्रा

ठंडा और नम मौसम वायरस के लिए अनुकूल होता है। ऐसे मौसम में वायरस लंबे समय तक सतहों पर टिक सकता है। साथ ही छुट्टियों के दौरान लोगों की यात्रा बढ़ती है जिससे वायरस एक जगह से दूसरी जगह फैल जाता है। सिंगापुर में चीनी नव वर्ष के समय यह देखा गया था।

क्या नया कोरोना पहले जितना खतरनाक है?

अभी जो नए वेरिएंट सामने आ रहे हैं, वे ज्यादातर हल्के लक्षण वाले हैं। इनमें बुखार, खांसी, सर्दी जैसे लक्षण होते हैं। भारत में गंभीर मामलों की संख्या बहुत कम है और अधिकतर मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ी है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि लापरवाही की जाए। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह फिर भी खतरनाक हो सकता है।

कैसे करें खुद का बचाव?

1. मास्क पहनें

भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क जरूर लगाएं, खासकर बंद जगहों में जहां हवा का प्रवाह कम होता है।

2. हाथ साफ रखें

बार-बार साबुन से हाथ धोते रहें। जब बाहर हों तो सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।

3. बूस्टर डोज जरूर लें

अगर आपने बूस्टर डोज नहीं ली है तो जल्द से जल्द लगवाएं। इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और वायरस से बचाव होगा।

4. लक्षण नजर आएं तो जांच कराएं

अगर आपको बुखार, खांसी या सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और कोविड टेस्ट कराएं।

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