Edited By Anu Malhotra,Updated: 05 Jan, 2026 01:55 PM

जाति-पाति की सोच को बदलने में सरकार की पहल अब सीधे लोगों की ज़िंदगी में असर दिखा रही है। इसी प्रयास का ताजा उदाहरण हैं कोरबा जिले के अभिषेक आदिले और बबीता देवांगन की शादी।
नेशनल डेस्क: जाति-पाति की सोच को बदलने में सरकार की पहल अब सीधे लोगों की ज़िंदगी में असर दिखा रही है। इसी प्रयास का ताजा उदाहरण हैं कोरबा जिले के अभिषेक आदिले और बबीता देवांगन की शादी।
अभिषेक आदिले, जो कोरबा के पुरानी बस्ती के अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, और 20 वर्षीय बबीता देवांगन, जांजगीर-चांपा जिले के ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखती हैं, ने समाज में prevailing social barriers को पार करते हुए अंतर्जातीय विवाह (inter caste marriage) किया। दोनों परिवारों ने इस रिश्ते का सम्मान किया और समाज के लिए प्रेरक उदाहरण पेश किया।
आर्थिक सहायता से नई शुरुआत
केंद्र और राज्य सरकार की अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत इस जोड़ी को कुल 2.50 लाख रुपये की मदद भी दी गई। 1 लाख रुपये तत्काल उनके संयुक्त बैंक खाते में जमा कर दिए गए। बाकी 1.50 लाख रुपये तीन साल की सावधि जमा के रूप में निवेश किए गए हैं, ताकि यह राशि उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा में काम आए। इस वित्तीय सहयोग ने अभिषेक और बबीता को अपने नए जीवन की शुरुआत आत्मनिर्भर और सुरक्षित तरीके से करने में मदद की।
योजना का सामाजिक संदेश
यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य है:
समाज में जातीय भेदभाव को कम करना
-युवाओं को पारंपरिक रूढ़िवाद से मुक्त करना
-सामाजिक समरसता और समानता को बढ़ावा देना
-सरकार का यह प्रयास युवाओं में प्रेम, सम्मान और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत कर रहा है।
अभिषेक-बबीता की कहानी: प्रेरणा का स्रोत
चार साल पहले शादी के बंधन में बंधे इस दंपत्ति ने यह साबित किया कि अगर विश्वास और साहस हो, तो जाति-पाति की दीवारें आसानी से गिर सकती हैं। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि सरकारी योजनाएँ तब सार्थक होती हैं, जब समाज उन्हें अपनाकर सकारात्मक बदलाव लाता है।