Ghanta Ghar Mandi: आत्मा को रोकने के लिए बजाया जाता है घंटा, पढ़ें रोचक इतिहास

Edited By Updated: 04 Jan, 2025 12:05 PM

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देश स्वतंत्र होने से पूर्व हिमाचल 31 रियासतों में बंटा था। इसमें चम्बा रियासत सबसे प्राचीन थी। मंडी रियासत पर बंगाल के सेन वंशजों का 668 वर्षों तक शासन रहा। इस रियासत के अंतिम राजा जोगेंद्र सेन

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Ghanta Ghar Mandi In Himachal Pradesh: देश स्वतंत्र होने से पूर्व हिमाचल 31 रियासतों में बंटा था। इसमें चम्बा रियासत सबसे प्राचीन थी। मंडी रियासत पर बंगाल के सेन वंशजों का 668 वर्षों तक शासन रहा। इस रियासत के अंतिम राजा जोगेंद्र सेन (1902-1948) हुए। वर्ष 1684 से 1727 ई. तक राजा सिद्धसेन ने राज किया। वह विशाल देह के स्वामी थे। उनके पांव अपेक्षा से अधिक लम्बे थे। वह अपने जूते का इस्तेमाल दोषी व्यक्ति से सच उगलवाने के लिए करते थे। सिद्धसेन तंत्र-मंत्र विद्या के भी परम ज्ञाता थे। कहा जाता है कि उन्होंने काली की सिद्धि कर रखी थी।

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राजा सिद्धसेन की बेटी का विवाह भंगाल रियासत के राजा पृथीपाल से हुआ। यह बहुत बड़ी रियासत थी। सामरिक दृष्टि से भी सुरक्षित थी। उसके एक और 14,000 फुट ऊंचा पहाड़ तो दूसरी ओर उफनती नदी बहती थी। राजा का किला बहुत ऊंचाई पर था, जहां शत्रुओं का पहुंचना खतरे से खाली न था। पृथीपाल रंगीन मिजाज राजा था। उसकी अय्याशी से रानी परेशान थी। उसने कई बार पति को समझाया कि वह रियासत व अपनी प्रजा पर ध्यान दे। पति के आचरण से हताश होकर रानी एक दिन अपने मायके लौट आई।

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बेटी को अकेला आया देख सिद्धसेन को दाल में कुछ काला नजर आया। रानी ने रोते हुए अपने पति के बारे में पिता को सब कुछ बता दिया। बेटी की दामाद द्वारा की जा रही अवहेलना से राजा सिद्धसेन आग-बबूला हो गए। उन्होंने दामाद को सबक सिखाने का मन बनाया। वह एक तीर से दो शिकार करना चाहते थे। बेटी के तिरस्कार का बदला और भंगाल रियासत पर कब्जा।

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राजा सिद्धसेन ने अपना दूत भंगाल भेजा और संदेश में मंडी आने का निमंत्रण दिया। राजा के विश्वासपात्र वजीरों ने राजा को सलाह दी कि वह मंडी न जाए। इसमें उन्हें षड्यंत्र का आभास हो रहा है। पृथीपाल ने उनकी एक न सुनी और दूत के साथ मंडी के लिए रवाना हो गया। सिद्धसेन ने दामाद को महल में नजरबंद कर दिया। पृथीपाल को अपनी भूल का एहसास हुआ। सुकेत के राजा की सहायता से वह महल से बाहर आ गया। जब वह सुकेत के दूत के साथ ब्यास नदी पार कर रहा था तो किश्ती के मल्लाहों ने उसे पहचान लिया और राजा सिद्धसेन को इसकी खबर कर दी। राजा ने आवेश में दामाद पृथीपाल का वध कर सिर सिद्ध सर तालाब के बीच और टांगों व बाजुओं को चारों कोनों में दबा दिया। पति की निर्मम हत्या से रानी को बड़ा सदमा लगा। उसने आत्महत्या कर ली।
उधर कुल्लू के राजा मान सिंह ने भंगाल रियासत पर आक्रमण कर उसे अपने राज्य में मिला लिया।

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पृथीपाल की भटकती आत्मा की शांति के लिए हर दिन सिद्ध सर तालाब के पास दीपक जलाया जाने लगा। वहां एक घंटा भी लगाया गया, ताकि उसे बजाकर पृथीपाल की आत्मा को आने से रोका जा सके। राजा सिद्धसेन ने यहां जो घंटा लगाया था, उसके स्थान पर सन् 1934 में सर आर्थर मिल्स नामक अंग्रेज ने सुंदर घंटाघर का निर्माण करवाया। इस घंटे के चारों ओर बड़ी-बड़ी घड़ियां लगाई गईं जो एक साथ बजती हैं। यह घंटाघर इतिहास का साक्षी है।

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