भारत ने किया एयर स्पेस लॉक, 35×3 किमी में खिंची लक्ष्मण रेखा, चीन-पाक ड्रोन दिखे तो होंगे ढेर

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 04:47 PM

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भारतीय सेना ने देश की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर दुश्मन के ड्रोन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए निगरानी और जवाबी कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी खुद संभाल ली है। अब अगर सीमा से 35 किलोमीटर तक जमीन के भीतर या 3 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर कोई दुश्मन ड्रोन...

नई दिल्ली: देश की सुरक्षा को लेकर भारतीय सेना ने सीमाओं पर चौकसी को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। अब उत्तरी और पश्चिमी सीमा के पास दुश्मन का कोई भी ड्रोन अगर ज़मीन से 35 किलोमीटर के दायरे या 3 किलोमीटर की ऊंचाई में दाखिल होता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। हथियारों से लैस और जासूसी करने वाले ड्रोनों की बढ़ती घुसपैठ के बीच सेना ने खुद मोर्चा संभालते हुए साफ कर दिया है कि अब आसमान से होने वाली किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
 
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने अपनी सैन्य रणनीति में कई बड़े बदलाव किए हैं। इसी के तहत नई रॉकेट रेजिमेंट बनाई गई हैं और ड्रोन से जुड़ी जिम्मेदारियों को नए सिरे से तय किया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा के पास होने वाली करीब 97 प्रतिशत ड्रोन और एंटी-ड्रोन गतिविधियों को अब सेना सीधे नियंत्रित करेगी।

 सीमाओं पर बनेंगे एयर कमांड और कंट्रोल सेंटर
पाकिस्तान से लगी पश्चिमी सीमा (LoC) और चीन से लगी उत्तरी सीमा (LAC) पर Army Air Command और Control Center तैयार कर रही है। ये सेंटर न केवल दुश्मन के ड्रोन पर नजर रखेंगे, बल्कि अपने ड्रोन भी उड़ाएंगे और खतरा दिखते ही दुश्मन के ड्रोन को गिराने की कार्रवाई करेंगे।

30 हजार से ज्यादा ड्रोन तैनात करने की योजना
भारतीय सेना पाकिस्तान से सटी पश्चिमी सीमा पर लगभग 10,000 ड्रोन तैनात करने की तैयारी में है। वहीं चीन से लगी 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 20,000 से ज्यादा ड्रोन हमेशा तैयार रखे जाएंगे। इन ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, सूचना जुटाने और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई के लिए किया जाएगा।

वायु सेना और खुफिया एजेंसियों से तालमेल
इस पूरे अभियान में सेना अकेले काम नहीं करेगी। सेना के कोर कमांडर, भारतीय वायु सेना के क्षेत्रीय कमांडरों के साथ मिलकर रणनीति बनाएंगे। इसके अलावा खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा संस्थानों से भी लगातार तालमेल रखा जाएगा ताकि किसी भी खतरे की जानकारी पहले ही मिल सके।

पाकिस्तान और चीन की ड्रोन गतिविधियों से बढ़ी चिंता
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने तुर्की और चीन में बने ड्रोनों को झुंड के रूप में भेजने की कोशिश की थी। वहीं चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) भी एलएसी पर भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है। इन्हीं घटनाओं के बाद भारत ने ड्रोन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

रॉकेट फोर्स और नई सैन्य तैनाती
भारतीय सेना पहले ही रॉकेट फोर्स की 2 यूनिट तैनात कर चुकी है। इसके अलावा दो रुद्र ब्रिगेड और 21 भैरव बटालियन को भी सीमावर्ती इलाकों में लगाया गया है। आर्टिलरी ब्रिगेड की मारक क्षमता को भी बढ़ाया जा रहा है, जिसकी रेंज पहले 150 किलोमीटर थी, अब उसे 1,000 किलोमीटर तक बढ़ाने की तैयारी है। रॉकेट फोर्स का गठन खास तौर पर चीन की रणनीति को देखते हुए किया गया है। गलवान घाटी में तनाव के बाद चीन ने एलएसी के उस पार रॉकेट रेजिमेंट तैनात की थी, जिसके जवाब में भारत ने भी अपनी ताकत को और मजबूत किया है।

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