Bank Loan Defaulter: लोन नहीं चुकाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बैंकों को दे दी ये खुली छूट

Edited By Updated: 28 Apr, 2025 10:07 AM

supreme court decision to take action against bank loan defaulters

देश के बड़े लोन डिफॉल्टरों के लिए बुरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उन आदेशों को रद्द कर दिया है...

नेशनल डेस्क: देश के बड़े लोन डिफॉल्टरों के लिए बुरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनकी वजह से बैंकों की आपराधिक कार्यवाहियां और फ्रॉड डिक्लेरेशन प्रक्रियाएं रुकी हुई थीं। इस फैसले से बैंकों और आरबीआई को कर्ज न चुकाने वालों के खिलाफ अब खुलकर कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो गया है।

अब नए सिरे से शुरू होगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट की एम.एम. सुंदरेश और राजेश बिंदल की बेंच ने यह स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रशासनिक कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन के आधार पर रद्द कर दिया गया है तो भी इससे नए सिरे से कार्रवाई करने पर कोई रोक नहीं लगती। यानी अब बैंक और अन्य अधिकारी फिर से आपराधिक कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।

बैंकों के पास फिर से मिलेगा एक्शन का अधिकार

कोर्ट ने कहा कि देश के कई हाईकोर्ट्स ने अपनी सीमाओं से आगे जाकर उन एफआईआर और आपराधिक कार्यवाहियों को भी रद्द कर दिया था, जिनके खातों को फ्रॉड घोषित किया गया था। जबकि ऐसी घोषणाओं को सही तरीके से चुनौती भी नहीं दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह वैध है और इस पर कोई रोक नहीं होगी।

RBI और बैंकों की कार्रवाई अलग

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई और बैंकों द्वारा की गई प्रशासनिक कार्रवाई और आपराधिक कार्यवाही दो अलग-अलग प्रक्रिया हैं। अगर कोई अपराध बनता है तो एफआईआर दर्ज की जा सकती है, भले ही प्रशासनिक कार्रवाई में कोई दोष नजर न आए। दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य और आधार एक-दूसरे से अलग है।

समान तथ्य होने पर भी होगी कार्रवाई

कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ इसलिए कि प्रशासनिक और आपराधिक कार्यवाहियों में तथ्य समान हैं, यह नहीं माना जा सकता कि एक प्रक्रिया के खत्म हो जाने पर दूसरी प्रक्रिया भी खत्म हो जाएगी। इसका मतलब साफ है कि यदि बैंक किसी डिफॉल्टर को फ्रॉड घोषित करता है और उसके खिलाफ अपराध साबित होता है तो एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह से सही रहेगा।

बैंकों को अब ज्यादा ताकत

इस फैसले के बाद बैंकों और फाइनेंशियल संस्थाओं को लोन न चुकाने वालों के खिलाफ तेजी से कानूनी कार्रवाई करने का रास्ता मिल गया है। बैंकों के लिए यह राहत की खबर है और डिफॉल्टरों के लिए बड़ा झटका।

डिफॉल्टरों के बुरे दिन शुरू

अब बैंकों के लोन लेकर चुप बैठ जाने वालों को गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को पूरी कानूनी ताकत दे दी है कि वे बड़े डिफॉल्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाएं। इससे बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और अनुशासन आने की उम्मीद है।

 

 

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