Edited By Niyati Bhandari,Updated: 18 Oct, 2022 10:41 AM

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में शुरू हुए ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान से दशभर के लोग जुड़ रहे हैं। यह अभियान लड़कियों के बाल विवाह के खिलाफ देश ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा जागरुकता अभियान बन गया है।
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नई दिल्ली (नवोदय टाइम्स): नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में शुरू हुए ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान से दशभर के लोग जुड़ रहे हैं। यह अभियान लड़कियों के बाल विवाह के खिलाफ देश ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा जागरुकता अभियान बन गया है।
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कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) संस्था ने दावा किया है कि इस अभियान के तहत देश भर के 26 राज्यों में 500 से अधिक जिलों में करीब 10 हजार गांवों की 70 हजार से अधिक महिलाओं और बच्चों की अगुआई में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित कर दीया जलाया गया और कैंडिल मार्च निकाला गया। अभियान में दो करोड़ से अधिक लोगों ने हिस्सेदारी कर और बाल विवाह को खत्म करने की शपथ लिया।
इस बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की खास बात यह थी कि सड़कों पर उतर कर नेतृत्व करने वाली महिलाओं में, ऐसी महिलाओं की संख्या ज्यादा थी जो कभी खुद बाल विवाह के दंश का शिकार हो चुकी थी। कई जगह अभियान का नेतृत्व उन बेटियों ने किया, जिन्होंने समाज और परिवार से विद्रोह कर न केवल अपना बाल विवाह रुकवाया, बल्कि अपनी जैसी कई अन्य लड़कियों को भी बाल विवाह का शिकार होने से बचाया।
सभी ने एक स्वर में बाल विवाह को रोकने के लिए कानूनों का सख्ती से पालन करने और 18 साल तक सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की बात कही। गौरतलब है कि संख्या और व्यापकता की दृष्टि से बाल विवाह के खिलाफ ग्रासरूट लेबल पर एक दिन में इतने बड़े पैमाने पर कार्यक्रम देश-दुनिया में पहली बार आयोजित हुआ है।
अभियान की सफलता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यह उत्तर में दुनिया के सबसे ऊंचे स्थानों में से एक लद्दाख के ‘खारदुंग पास’ से लेकर कश्मीर की विश्व प्रसिद्ध डल झील और देश की राजधानी के ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों राजघाट, इंडिया गेट और कुतुबमीनार पर भी पहुंचा।
