UGC विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले- किसी पर अत्याचार या भेदभाव नहीं किया जाएगा

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 05:20 PM

dharmendra pradhan on ugc row promises no discrimination under new rules

उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव रोकने के लिए लाए गए नए नियमों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र का पहला बयान सामने आया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत में विश्वास दिलाया है कि किसी भी अभ्यर्थी या शिक्षक का...

नेशनल डेस्क: उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव रोकने के लिए लाए गए नए नियमों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र का पहला बयान सामने आया है।शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत में विश्वास दिलाया है कि किसी भी अभ्यर्थी या शिक्षक का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में विनम्रता के साथ कहा कि "मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी के साथ भेदभाव या उत्पीड़न नहीं होगा। चाहे यूजीसी हो, राज्य सरकार हो या केंद्र, कोई भी कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। हर फैसला संविधान के दायरे में ही लिया जाएगा।"

PunjabKesari

धर्मेंद्र प्रधान का बयान
देखिए एक बात बहुत विनम्रता से स्पष्ट करना चाहता हूं कि किसी को उत्पीड़न होने नहीं दिया जाएगा। और भेदभाव नहीं होगा। किसी को डिस्क्रिमिनेशन के नाम पर कोई भी मिस्यूज करने का अधिकार नहीं होगा। इसमें यूजीसी हो, भारत सरकार हो या राज्य सरकार हो इसके दायित्व रहेगी। मैं आश्वस्त करता हूं कि जो भी व्यवस्था हुई है संविधान के परिधि के अंदर होगा। और ये जो विषय आई है ये तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में व्यवस्था है। मैं आश्वस्त और अपील करना चाहता हूं कि किसी के ऊपर भेदभाव या किसी के ऊपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।

PunjabKesari

विवाद की मुख्य वजह

UGC द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी किए गए 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम' में चार प्रमुख बातें कही गई हैं:

  1. समितियों का गठन: हर कॉलेज में 'इक्विटी कमेटी' और 'इक्विटी स्क्वॉड' बनाना अनिवार्य होगा।

  2. 24x7 हेल्पलाइन: शिकायतों के लिए राउंड द क्लॉक सिस्टम।

  3. SC-ST सुरक्षा: आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना।

  4. कठोर दंड: नियमों का पालन न करने पर संस्थानों की मान्यता रद्द हो सकती है या फंड रोका जा सकता है।

विरोध की वजह

प्रदर्शनकारियों और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका का दावा है कि ये नियम केवल SC, ST और OBC को सुरक्षा देते हैं, जबकि General Category के छात्रों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि भेदभाव किसी के भी साथ हो सकता है, इसलिए कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए।

 

Related Story

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!