Edited By Anu Malhotra,Updated: 29 Jan, 2026 09:44 AM

देश में बिजली व्यवस्था को लेकर एक नई चिंता खड़ी होती दिख रही है। बिजली क्षेत्र के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने सड़क पर उतरकर सरकार के फैसले के खिलाफ...
नेशनल डेस्क: देश में बिजली व्यवस्था को लेकर एक नई चिंता खड़ी होती दिख रही है। बिजली क्षेत्र के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने सड़क पर उतरकर सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि अगर निजीकरण की प्रक्रिया नहीं रुकी, तो यह आंदोलन देशव्यापी हड़ताल में बदल सकता है, जिससे बिजली संकट गहराने का खतरा पैदा हो सकता है।
गोरखपुर में चीफ इंजीनियर कार्यालय के बाहर बिजली कर्मियों, इंजीनियरों और कर्मचारियों की भारी भीड़ जुटी, जहां सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। यह विरोध विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर किया गया। समिति से जुड़े नेताओं ने बताया कि केंद्र सरकार आगामी बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 पेश करने की तैयारी में है। कर्मचारियों का आरोप है कि इस बिल के जरिए बिजली क्षेत्र को धीरे-धीरे निजी कंपनियों के हवाले करने की जमीन तैयार की जा रही है, जिससे सरकारी बिजली व्यवस्था कमजोर होगी और आम जनता को नुकसान उठाना पड़ेगा।
कर्मचारियों को किस बात की चिंता?
प्रदर्शन कर रहे बिजली कर्मियों का कहना है कि निजीकरण से सबसे बड़ा खतरा नौकरियों पर मंडरा रहा है। संविदा कर्मचारियों की छंटनी तेज हो सकती है, जबकि स्थायी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि, पदोन्नति और पेंशन जैसी सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक पूरी निष्ठा से सेवा दी है, लेकिन अब उनके भविष्य को अनिश्चित बना दिया गया है। कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि निजीकरण का असर सिर्फ विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और आम आदमी को महंगी बिजली का सामना करना पड़ सकता है।
जनता पर बढ़ेगा बोझ?
संघर्ष समिति का कहना है कि निजी कंपनियों के प्रवेश से बिजली दरों में बढ़ोतरी तय है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। ग्रामीण इलाकों में पहले से ही चुनौतियों से जूझ रही बिजली आपूर्ति और महंगी हो सकती है, जिससे किसानों और छोटे उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ेगी।
सरकार के सामने रखी मांग
बिजली कर्मचारियों ने मांग की है कि बिजली विभाग को पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रखा जाए और निजीकरण की सभी प्रक्रियाओं पर तुरंत रोक लगाई जाए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो देशभर में हड़ताल और बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल बिजली विभाग की नहीं है। आने वाले समय में किसान संगठनों, मजदूर यूनियनों और आम जनता को भी इस आंदोलन से जोड़ा जाएगा। साथ ही सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की गई है, लेकिन यह भी साफ किया गया है कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं।