Edited By Anu Malhotra,Updated: 30 Jan, 2026 03:37 PM

दिल्ली के युवा उद्यमी मुकुल छाबड़ा ने साल 2019 में एक ऐसी समस्या को चुना जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते थे—असंगठित कबाड़ बाजार। आज उनका स्टार्टअप 'स्क्रैपअंकल' (ScrapUncle) देश के वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर में एक बड़ा नाम बन चुका है।
नेशनल डेस्क: दिल्ली-एनसीआर का एक युवा उद्यमी मुकुल छाबड़ा ने घर-घर से कबाड़ इकट्ठा करने के पारंपरिक और अव्यवस्थित काम को डिजिटल रूप में बदलकर एक बड़ा बिजनेस खड़ा कर दिया है। उनका स्टार्टअप ‘स्क्रैपअंकल’ (ScrapUncle) अब तक 2 करोड़ किलो कचरे को रीसायकल कर चुका है और हाल ही में प्री-सीरीज ए राउंड में ₹22 करोड़ की फंडिंग जुटाने में सफल रहा।
इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Orios Venture Partners और Acumen Fund ने किया है। कंपनी की यह छलांग न केवल उसके विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के बदलते वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर की दिशा को भी दर्शाती है।
कबाड़ का कारोबार अब स्मार्ट और पारदर्शी
स्क्रैपअंकल का मिशन सरल है: कबाड़ बेचने के काम को झंझट मुक्त, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना।
कैसे काम करता है स्टार्टअप:
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डोरस्टेप पिकअप: ग्राहक ऐप पर बुकिंग करते हैं और प्रशिक्षित स्क्रैप कलेक्टर उनके घर से कबाड़ उठा लेते हैं।
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पूर्ण पारदर्शिता: वजन डिजिटल स्केल पर तय होता है और कीमतें पहले से स्पष्ट होती हैं।
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विस्तृत कवरेज: पेपर, प्लास्टिक, धातु, ई-वेस्ट और पुरानी गाड़ियाँ—हर तरह के कबाड़ का रीसाइक्लिंग।
नई फंडिंग का मकसद
₹22 करोड़ की इस फंडिंग से स्क्रैपअंकल के पास अब और बड़े कदम उठाने की क्षमता है:
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दिल्ली-एनसीआर में विस्तार: मौजूदा इलाके में सेवाओं को और मजबूत बनाना।
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अन्य बड़े शहरों में प्रवेश: मेट्रो शहरों में सेवाओं को शुरू करना।
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ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग यूनिट: इन-हाउस रीसाइक्लिंग फैसिलिटी स्थापित करना।
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तकनीक और रोजगार: ऐप को और बेहतर बनाना और अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करना।
शार्क टैंक से ₹45 करोड़ के बिजनेस तक
2019 में मुकुल छाबड़ा ने स्क्रैपअंकल की शुरुआत की थी। शार्क टैंक इंडिया के दूसरे सीजन में उन्होंने अमित जैन से ₹60 लाख का निवेश हासिल किया।
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अब तक 2 करोड़ किलो कचरा रीसायकल किया जा चुका है।
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3 लाख से अधिक पिकअप्स पूरे किए जा चुके हैं।
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वर्तमान में कंपनी का टर्नओवर ₹45 करोड़ के करीब है।
अनऑर्गेनाइज्ड मार्केट में नई दिशा
भारत में कबाड़ का बाजार लंबे समय से बिखरा हुआ था, जिसमें बिचौलियों का दबदबा था। स्क्रैपअंकल जैसी कंपनियां सीधे कबाड़ इकट्ठा करने वालों (gig workers) को जोड़कर पूरी प्रणाली को व्यवस्थित कर रही हैं। इससे न सिर्फ कचरे की ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित होती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
क्लीनटेक सेक्टर में स्क्रैपअंकल के साथ Scrapdeal, Let’scrap और Atterro जैसे अन्य स्टार्टअप भी तेजी से उभर रहे हैं। डीपीआईआईटी के अनुसार, भारत में अब तक 1411 वेस्ट मैनेजमेंट स्टार्टअप्स को मान्यता दी गई है, जिनमें अधिकांश नॉन-मेट्रो शहरों से आए हैं।