किस देश के पास है दुनिया की सबसे खतरनाक पनडुब्बी 'टायफून क्लास'? जानिए इसकी बेजोड़ ताकत के बारे में

Edited By Updated: 26 May, 2025 03:02 PM

which country has the world s most dangerous submarine typhoon class

किसी भी देश की नौसेना के लिए पनडुब्बी उसकी रीढ़ की हड्डी होती है। आधुनिक युद्ध केवल सतह पर लड़े जाने वाले हथियारों तक सीमित नहीं हैं। दुश्मन को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए एक नौसेना के पास ऐसी आधुनिक और खतरनाक पनडुब्बियां होनी चाहिए जो समुद्र के...

नेशनल डेस्क। किसी भी देश की नौसेना के लिए पनडुब्बी उसकी रीढ़ की हड्डी होती है। आधुनिक युद्ध केवल सतह पर लड़े जाने वाले हथियारों तक सीमित नहीं हैं। दुश्मन को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए एक नौसेना के पास ऐसी आधुनिक और खतरनाक पनडुब्बियां होनी चाहिए जो समुद्र के नीचे से सटीक वार कर सकें और पलक झपकते ही दुश्मन के किसी भी बंदरगाह या इलाके को तबाह कर सकें। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार 1776 में अमेरिका ने पहली बार पनडुब्बी बनाई थी जिसका इस्तेमाल ब्रिटिश जहाजों पर हमला करने के लिए किया गया था लेकिन आज के दौर में सबसे खतरनाक पनडुब्बियां कौन सी हैं और उनकी ताकत कितनी है आइए जानते हैं।

सबसे खतरनाक पनडुब्बी 'टायफून क्लास'

पनडुब्बियों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा विश्वयुद्ध के दौरान किया गया जब ये नौसेना के लिए एक बेहद ज़रूरी हथियार बन गईं। उसके बाद खतरनाक पनडुब्बी बनाने की होड़ सी मच गई। आज के दौर में सबसे खतरनाक पनडुब्बियां रूस और अमेरिका के पास हैं। इनमें से रूस के पास मौजूद 'टायफून क्लास' पनडुब्बी को सबसे खतरनाक माना जाता है।

बता दें कि परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इस पनडुब्बी का निर्माण तत्कालीन सोवियत रूस ने 1960 और 70 के दशक में किया था। इसके निर्माण के पीछे का मुख्य उद्देश्य शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और उनके सहयोगियों से निपटना था।

 

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'टायफून क्लास' की विशालता और सुविधाएं

इन पनडुब्बियों का आकार इतना विशाल था कि यह तीन फुटबॉल मैदान से भी बड़ा था। इसकी लंबाई 175 मीटर और चौड़ाई 23 मीटर थी जबकि इसकी गहराई 12 मीटर तक थी। अभी तक बनी सभी पनडुब्बियों में यह सबसे बड़ी पनडुब्बी है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी पनडुब्बी में स्विमिंग पूल और गोल्फ कोर्स जैसी कई विलासितापूर्ण सुविधाएं भी दी गई थीं।

हालांकि अब अधिकांश 'टायफून क्लास' पनडुब्बियां सेवा से बाहर हो चुकी हैं। वर्तमान में केवल 'दिमित्री डोंस्कॉय' ही सेवा में है और इसे भी शायद 2026 तक सेवामुक्त कर दिया जाएगा।

 

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'टायफून क्लास' की मारक क्षमता

यह पनडुब्बी कितनी खतरनाक थी इसका अंदाजा इसकी मारक क्षमता से लगाया जा सकता है। इसमें 20 विशाल आर-39 रिफ अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों को लगाया गया था। यह एक 53 फुट लंबा और 8 फुट चौड़ा हथियार था। ये मिसाइलें अमेरिका या यूरोप के किसी भी हिस्से तक परमाणु हमला कर सकती थीं और इनमें दुश्मनों को पूरी तरह खत्म करने की क्षमता मौजूद थी। 'टायफून क्लास' पनडुब्बी शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ की परमाणु क्षमता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ थी जो दुनिया को इसकी विध्वंसक शक्ति का एहसास कराती थी।

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